एक बैंक कर्मचारी भी चुनाव लड़ सकता है
सच बताऊ तो मुझे बिल्कुल भी नही पता था पर धन्यवाद वी बैंकर्स के जवानों को जिन्होंने चुनाव लड़ने वाला नियम कुछ घंटों में निकाल कर सबके सामने रख दिया । ये हौसले जज्बे को न्यूटन भाई का दिल से सलाम है
जहाँ इस खबर से की एक बैंक कर्मचारी भी लोकसभा का चुनाव लड़ सकता है, बड़े बड़े नेताओं की फट गई है( क्या फटी उसके लिए अपने विवेक का इस्तेमाल करे) वही कुछ बैंक कर्मचारी इन ऊर्जावान वी बैंकर्स के सदस्यों को हतोत्साहित करने में लगे है कि ऐसा हो नही सकता, मजाक है क्या, भटक गया वी बैंकर और न जाने क्या क्या ...
बैंकर्स के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही है, उन्हें लगता है कि सबसे ज्यादा गुणा भाग उन्होंने ही कर रखा है, अगर मिया राजू कैश पर रहेंगे तो वो भी रहेंगे
सुरेश जी लोन पर बैठेंगे तो वो भी शायद इसलिए बैठेंगे की सुरेश या तो परम मित्र हैं उनका या जानी दुश्मन
क्या आपको नही लगता कि लगभग हर विभाग में आपको विभिन्न क्षेत्रों में पारंगत व्यक्ति हैं और वो अपनी नौकरी के साथ व्यवसाय, राजनीति, खेल , कवि इत्यादि में भी अपना हुनर दिखाते हुए मिल जाएंगे ।
पर बैंक कर्मचारी का जन्म केवल बैंक में कार्य करने के लिए ही हुआ है, उसे केवल अपने उच्च अधिकारियों के दिमाग पर भरोसा करना है और निम्न अधिकारियों को टेनिस बाल की तरह मारना है और सबसे महत्वपूर्ण यदि कोई कुछ नया करना चाहे तो उसे कुछ मंदबुद्धि लोग नौकरी छोड़ने की सलाह देने लगते हैं,
शायद यही सबसे बड़ी वजह है जिसमे एक बैंक कर्मचारी को आप किसी अन्य क्षेत्र में नही पाते हो, एक बैंक कर्मचारी अपनी पूरी जिंदगी 4*4 के केबिन में ही बिता देता है और उसकी मैय्यत पर भी 4 आदमी इक्कठा नही होते
ये तब हाल है जबकि बैंक में विभिन्न क्षेत्रों से लोग आए हुए हैं, उनकी आत्मा मर गयी है उन्हें दिन रात मुनाफा मुनाफा ही दिखता है, उनके अंदर का हुनर जो कभी कभी बाहर आने को उत्तेजित होता है उसे उसके बैंक मित्र ही जंग लगाने पर मजबूर किये हुए हैं ।
अन्य विभागों में हुनर को मौका दिया जाता है और उन्हें गर्व महसूस होता है कि मेरे विभाग का व्यक्ति दूसरे क्षेत्र में भी अपना परचम फैला रहा है पर एक बैंक कर्मचारी रोज शाम को अपने ही बैंक भाई के दराज में अपना काम रख कर उच्च अधिकारी से शाबाशी लेने चला जाता है।
आखिर क्यों ???
जवाब चाहिए हमे खास कर उन लोगो से जो तेल लगाने को अपना सबसे बड़ा हुनर और दूसरे को हतोत्साहित करने में फख्र महसूस करते हैं ।।
और सबसे महत्वपूर्ण जिनको अपने तेल पर बहुत गुमार हो उनको न्योता है मुफ्त का आ जाना हवेली पे ...
सच बताऊ तो मुझे बिल्कुल भी नही पता था पर धन्यवाद वी बैंकर्स के जवानों को जिन्होंने चुनाव लड़ने वाला नियम कुछ घंटों में निकाल कर सबके सामने रख दिया । ये हौसले जज्बे को न्यूटन भाई का दिल से सलाम है
जहाँ इस खबर से की एक बैंक कर्मचारी भी लोकसभा का चुनाव लड़ सकता है, बड़े बड़े नेताओं की फट गई है( क्या फटी उसके लिए अपने विवेक का इस्तेमाल करे) वही कुछ बैंक कर्मचारी इन ऊर्जावान वी बैंकर्स के सदस्यों को हतोत्साहित करने में लगे है कि ऐसा हो नही सकता, मजाक है क्या, भटक गया वी बैंकर और न जाने क्या क्या ...
बैंकर्स के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही है, उन्हें लगता है कि सबसे ज्यादा गुणा भाग उन्होंने ही कर रखा है, अगर मिया राजू कैश पर रहेंगे तो वो भी रहेंगे
सुरेश जी लोन पर बैठेंगे तो वो भी शायद इसलिए बैठेंगे की सुरेश या तो परम मित्र हैं उनका या जानी दुश्मन
क्या आपको नही लगता कि लगभग हर विभाग में आपको विभिन्न क्षेत्रों में पारंगत व्यक्ति हैं और वो अपनी नौकरी के साथ व्यवसाय, राजनीति, खेल , कवि इत्यादि में भी अपना हुनर दिखाते हुए मिल जाएंगे ।
पर बैंक कर्मचारी का जन्म केवल बैंक में कार्य करने के लिए ही हुआ है, उसे केवल अपने उच्च अधिकारियों के दिमाग पर भरोसा करना है और निम्न अधिकारियों को टेनिस बाल की तरह मारना है और सबसे महत्वपूर्ण यदि कोई कुछ नया करना चाहे तो उसे कुछ मंदबुद्धि लोग नौकरी छोड़ने की सलाह देने लगते हैं,
शायद यही सबसे बड़ी वजह है जिसमे एक बैंक कर्मचारी को आप किसी अन्य क्षेत्र में नही पाते हो, एक बैंक कर्मचारी अपनी पूरी जिंदगी 4*4 के केबिन में ही बिता देता है और उसकी मैय्यत पर भी 4 आदमी इक्कठा नही होते
ये तब हाल है जबकि बैंक में विभिन्न क्षेत्रों से लोग आए हुए हैं, उनकी आत्मा मर गयी है उन्हें दिन रात मुनाफा मुनाफा ही दिखता है, उनके अंदर का हुनर जो कभी कभी बाहर आने को उत्तेजित होता है उसे उसके बैंक मित्र ही जंग लगाने पर मजबूर किये हुए हैं ।
अन्य विभागों में हुनर को मौका दिया जाता है और उन्हें गर्व महसूस होता है कि मेरे विभाग का व्यक्ति दूसरे क्षेत्र में भी अपना परचम फैला रहा है पर एक बैंक कर्मचारी रोज शाम को अपने ही बैंक भाई के दराज में अपना काम रख कर उच्च अधिकारी से शाबाशी लेने चला जाता है।
आखिर क्यों ???
जवाब चाहिए हमे खास कर उन लोगो से जो तेल लगाने को अपना सबसे बड़ा हुनर और दूसरे को हतोत्साहित करने में फख्र महसूस करते हैं ।।
और सबसे महत्वपूर्ण जिनको अपने तेल पर बहुत गुमार हो उनको न्योता है मुफ्त का आ जाना हवेली पे ...

