आखिर इतना डर क्यो है, किस बात का है | - We Bankers

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Monday, April 22, 2019

आखिर इतना डर क्यो है, किस बात का है |

घर मे काम करने वाला एक प्राइवेट नौकर भी अपने अधिकार जानता है,
उसे भी पता है जितना वेतन उतना काम ही करना है

कई बार या अक्सर मन भी करता है बड़ा बदतमीज है ये नौकर इसको निकाल दो लेकिन 2 4 10 सब लोग ऐसा ही करते हैं, धीरे धीरे खुद मालिक ही एडजस्ट करने लगता है और अगली बार से उसकी आवाज में धमकी नही रिक्वेस्ट होती है ।

ये जो 2 4 10 उसने बदले आखिर सब क्यो एक तरह से निकले, आखिर क्यों सबको अपने अधिकार पता थे, क्यो उन्हें नौकरी जाने का डर नही था , क्योकि उन्हें पता था मैं नही तो मेरा भाई ही इधर आएगा पर अधिकारों से समझौता कर लिया एक बार तो नौकरी बचाने के लिए भरपूर शोषण होगा और उसके बाद भी भूखो मरने की नौबत आएगी ।

एक अशिक्षित सा कम पढ़ा लिखा नौकर भी अपने अधिकार जानता है, उसे नौकरी का डर नही फिर पढ़ा लिखा बैंकर समुदाय किस बात से डरता है , क्यो अपने अधिकार से बाहर का काम लेता है और उसे पूरा करने का वचन दे देता है ।

आज बैंक में न्यूनतम स्टाफ है जहाँ रोज वाला काम करना ही बहुत मुश्किल है फिर आखिर कौन सा डर है जो इन लोगो को अपनी अश्रमर्थता जताने में शरम आती है ।

क्यो एक स्टाफ के छोटे से बिल में महीनों लग जाते हैं और प्राइवेट वेंडर का बिल तुरंत पास हो जाता है ।

आखिर इतना डर क्यो है, किस बात का है, अगर आपको पता हो तो बताइए जरूर
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