क्या कोई वरिष्ठ नेता मेरे दिमाग में कोंध रही कुछ उलझनो को सुलझा सकता है???
भारत में हर विभाग के कर्मचारियों के लिए जो कार्य आवंटित होता है उसे सिर्फ उस विभाग के कार्य के संबंध में जानकारी होना आवश्यक है। उदाहरण के लिए आयकर अधिकारी है तो उसे आयकर से संबंधित कानून की जानकारी होना आवश्यक है , यदि कोई राजस्व रजिस्टार ऑफिस में कार्यरत है तो उसे संपत्ति के रजिस्ट्रेशन से संबंधित जानकारी होना आवश्यक है, यदि कोई डॉक्टर है तो उसे मरीज के रोग के इलाज के बारे में जानकारी होना आवश्यक है, इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति प्राध्यापक है तो उसे उसके द्वारा पढ़ाए जाने वाले विषय के बारे में जानकारी होना आवश्यक है लेकिन क्या बैंक अधिकारी के केस में भी यह लागू होता है?????
जी नहीं।
एक बैंक अधिकारी को अपनी सेवाएं देते समय अनेकों अनेक विभागों की जानकारी होना आवश्यक है। उदाहरण के लिए निम्नलिखित समस्त विभागों की जानकारी ना रखी जाए तो बैंक अधिकारी को चार्जशीट का सामना करना पड़ सकता है।
1. खाता खोलते समय अपने ग्राहकों के बारे में जानने के लिए बैंक अधिकारी को आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, driving licence, बिजली बिल आदि सभी की जानकारी लेने के लिए ऑनलाइन साइट्स का ज्ञान होना आवश्यक है।
2. ऋण देते समय आयकर विभाग के समस्त नियम, कायदे, कानूनों की जानकारी,
विक्रय कर, जीएसटी, राज्य से संबंधित अन्य कर, राजस्व कर, स्टैंप ड्यूटी कानून आदि की जानकारी,
कृषि से संबंधित समस्त राज्यों के नियम, कायदे, कानून, समस्त प्रकार के उद्योगों से संबंधित अलग-अलग राज्यों की नीतियों का कार्यवयन,देश में दी जाने वाली समस्त प्रकार की सेवाओं के बारे में पूर्ण जानकारी तथा उनके कानूनी पहलू की जानकारी,
भारत सरकार, समस्त राज्य सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक आदि सभी के द्वारा प्रत्येक वर्ष जारी की जाने वाली नीतियों के बारे में जानकारी,
विदेश नीति, आर्थिक नीति, विदेशी विनिमय नीति, बजट, सामाजिक तानाबाना, बैंकों की आंतरिक ऋणनीति, जोखिम नीति, फेमा नीति, रिजर्व बैंक की तिमाही, छमाही तथा वार्षिक नीति आदि सभी की जानकारी,
साधारण बीमा की योजनाओं, जीवन बीमा की योजनाओं, मेडिकल बीमा के अंतर्गत बीमारियों के संबंध में जानकारी, शेयर बाजार, म्यूच्यूअल फंड बाजार, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग बाजार आदी सभी की जानकारी,
समस्त कानून जैसे एफ आई आर, सिविल सूट, फौजदारी सूट, वसूली कानून, पारिवारिक कोर्ट से संबंधित कानून, लिमिटेशन कानून, साझेदारी कानून, कंपनी कानून आदि सभी की जानकारी।
इन सभी जानकारियों के बिना कोई भी बैंक का सही प्रकार से ऋण प्रदान नहीं कर सकता है और यदि जानकारी के बिना रन प्रदान किया जाता है तो चार्चशीट उसका मुंह खोलकर इंतजार करती रहती है।
अब तुलना करते हैं उपरोक्त जानकारी के ज्ञाताओं के साथ एक बैंक अधिकारी के वेतन की।
क्या एक जज जिसे सिर्फ कानून की जानकारी है उससे बैंक अधिकारी का वेतन अधिक है???
क्या एक आयकर अधिकारी जिसे सिर्फ आयकर कानूनों की जानकारी है उससे बैंक अधिकारी का वेतन अधिक है???
क्या एक कलेक्टर या तहसीलदार जिसे सिर्फ राजस्व कानूनों की जानकारी है उससे बैंक अधिकारी का वेतन अधिक है???
क्या एक डॉक्टर जिसे सिर्फ रोगों की जानकारी है उससे बैंक अधिकारी का वेतन अधिक है???
क्या एक नेताजी जिसे किसी भी चीज की जानकारी नहीं है उससे बैंक अधिकारी का वेतन अधिक है???
सरकारी नीतियों, विदेशी नीतियों, कृषि नीतियों, आर्थिक नीतियों के जानकार आईएएस अधिकारी से क्या बैंक के अधिकारी का वेतन अधिक है???
*फिर भी हमारे नेता बाईपार्ट सेटेलमेंट को अंतिम रूप प्रदान करने के लिए इतने लाचार, इतने कमजोर और इतने असहाय क्यों नजर आते हैं???*
भारत में हर विभाग के कर्मचारियों के लिए जो कार्य आवंटित होता है उसे सिर्फ उस विभाग के कार्य के संबंध में जानकारी होना आवश्यक है। उदाहरण के लिए आयकर अधिकारी है तो उसे आयकर से संबंधित कानून की जानकारी होना आवश्यक है , यदि कोई राजस्व रजिस्टार ऑफिस में कार्यरत है तो उसे संपत्ति के रजिस्ट्रेशन से संबंधित जानकारी होना आवश्यक है, यदि कोई डॉक्टर है तो उसे मरीज के रोग के इलाज के बारे में जानकारी होना आवश्यक है, इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति प्राध्यापक है तो उसे उसके द्वारा पढ़ाए जाने वाले विषय के बारे में जानकारी होना आवश्यक है लेकिन क्या बैंक अधिकारी के केस में भी यह लागू होता है?????
जी नहीं।
एक बैंक अधिकारी को अपनी सेवाएं देते समय अनेकों अनेक विभागों की जानकारी होना आवश्यक है। उदाहरण के लिए निम्नलिखित समस्त विभागों की जानकारी ना रखी जाए तो बैंक अधिकारी को चार्जशीट का सामना करना पड़ सकता है।
1. खाता खोलते समय अपने ग्राहकों के बारे में जानने के लिए बैंक अधिकारी को आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, driving licence, बिजली बिल आदि सभी की जानकारी लेने के लिए ऑनलाइन साइट्स का ज्ञान होना आवश्यक है।
2. ऋण देते समय आयकर विभाग के समस्त नियम, कायदे, कानूनों की जानकारी,
विक्रय कर, जीएसटी, राज्य से संबंधित अन्य कर, राजस्व कर, स्टैंप ड्यूटी कानून आदि की जानकारी,
कृषि से संबंधित समस्त राज्यों के नियम, कायदे, कानून, समस्त प्रकार के उद्योगों से संबंधित अलग-अलग राज्यों की नीतियों का कार्यवयन,देश में दी जाने वाली समस्त प्रकार की सेवाओं के बारे में पूर्ण जानकारी तथा उनके कानूनी पहलू की जानकारी,
भारत सरकार, समस्त राज्य सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक आदि सभी के द्वारा प्रत्येक वर्ष जारी की जाने वाली नीतियों के बारे में जानकारी,
विदेश नीति, आर्थिक नीति, विदेशी विनिमय नीति, बजट, सामाजिक तानाबाना, बैंकों की आंतरिक ऋणनीति, जोखिम नीति, फेमा नीति, रिजर्व बैंक की तिमाही, छमाही तथा वार्षिक नीति आदि सभी की जानकारी,
साधारण बीमा की योजनाओं, जीवन बीमा की योजनाओं, मेडिकल बीमा के अंतर्गत बीमारियों के संबंध में जानकारी, शेयर बाजार, म्यूच्यूअल फंड बाजार, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग बाजार आदी सभी की जानकारी,
समस्त कानून जैसे एफ आई आर, सिविल सूट, फौजदारी सूट, वसूली कानून, पारिवारिक कोर्ट से संबंधित कानून, लिमिटेशन कानून, साझेदारी कानून, कंपनी कानून आदि सभी की जानकारी।
इन सभी जानकारियों के बिना कोई भी बैंक का सही प्रकार से ऋण प्रदान नहीं कर सकता है और यदि जानकारी के बिना रन प्रदान किया जाता है तो चार्चशीट उसका मुंह खोलकर इंतजार करती रहती है।
अब तुलना करते हैं उपरोक्त जानकारी के ज्ञाताओं के साथ एक बैंक अधिकारी के वेतन की।
क्या एक जज जिसे सिर्फ कानून की जानकारी है उससे बैंक अधिकारी का वेतन अधिक है???
क्या एक आयकर अधिकारी जिसे सिर्फ आयकर कानूनों की जानकारी है उससे बैंक अधिकारी का वेतन अधिक है???
क्या एक कलेक्टर या तहसीलदार जिसे सिर्फ राजस्व कानूनों की जानकारी है उससे बैंक अधिकारी का वेतन अधिक है???
क्या एक डॉक्टर जिसे सिर्फ रोगों की जानकारी है उससे बैंक अधिकारी का वेतन अधिक है???
क्या एक नेताजी जिसे किसी भी चीज की जानकारी नहीं है उससे बैंक अधिकारी का वेतन अधिक है???
सरकारी नीतियों, विदेशी नीतियों, कृषि नीतियों, आर्थिक नीतियों के जानकार आईएएस अधिकारी से क्या बैंक के अधिकारी का वेतन अधिक है???
*फिर भी हमारे नेता बाईपार्ट सेटेलमेंट को अंतिम रूप प्रदान करने के लिए इतने लाचार, इतने कमजोर और इतने असहाय क्यों नजर आते हैं???*

