पिछले बाईपरटाइट में दूसरे और चौथे शनिवार की छुट्टी को खूब बढ़ा चढ़ा कर बताया गया था और बोला गया था इसके लिए हमे कई मांगो को अपने चार्टर से हटाना पड़ा था , जहाँ एक बैंकर के लिए एक दिन की छुट्टी बहुत बड़ी बात होती है वहाँ एक महीने में 2 छुट्टी उनको परिवार के साथ समय बिताने के लिए एक अतिरिक्त खुशी थी ।।
पर इसका विश्लेषण टेक्निकल भाषा मे भी किया जाना आवश्यक है जो कि हर बैंकर को जानना जरूरी भी है ।।
एक साल में 365 दिन होते हैं जिसमे कम से कम 53 शनिवार तो आते ही है , दूसरे और चौथे शनिवार के बाद एक साल में शनिवार के नाम पर 12*2=24 छुट्टियां
इस प्रकार 24 शनिवार बंद
और 29 शनिवार खुला
पहले जब हाफ दे होता था शनिवार यानी 10 से 1 तक
अब जब फुल डे शनिवार है तो यानी 10 से 5
यानी एक शनिवार पर 4 Hrs ज्यादा
10 से 1 यानी 3 घंटा*53= 159 घंटे
(ये पहले थे 2015 से पहले)
अब 10 से 5 यानी 7 घंटा*29= 203 घंटे
यानी जब सभी शनिवार खुलते थे तो 159 घण्टे काम था ऑफिशली और अब जब 29 शनिवार खुला है तो 203 घंटे काम यानी 44 घंटे ज्यादा हर साल
ये ही समझाया था इन्होंने IBA को
और बैंकर को समझाया और दिखाया देखो हर नेक्स्ट शनिवार छुट्टी
अब चूंकि बैंकर के लिए पहले वाला शनिवार जो हाफ डे था उसका कोई खास मतलब नही था क्योंकि उसमे भी बाकी दिनों की तरह ही 5 बजे या उससे ज्यादा देर तक ही काम होता था, इसलिए शनिवार बंदी से सबसे ज्यादा ख़ुसी एक आम बैंकर को हुई
वही दूसरी तरफ 44 घंटे बैंक कर्मचारियों से काम करवा रहे IBA भी खुश कि वर्किंग hrs बढ़वा दिए ।
इसमे यूनियन का कोई बहुत बहादुरी वाला काम नही था पर एक आम बैंकर की नजर में वो हीरो बन गए पर इसके चक्कर मे बहुत से मुद्दों की बलि चढ़ानी पड़ी जिसका उन्होंने प्रचार किया पर विरोध नाममात्र का हुआ क्योकि 2 शनिवार बंदी से सब बहुत खुश थे और 44 घंटे ज्यादा से IBA भी खुश था।
आम जनता और खास कर प्रेस मीडिया वालों ने इसको हर शनिवार बंद रहेगा , ऐसी न्यूज़ खूब फैलाई और इतना फैलाया कि बैंक वालो की मस्ती ही मस्ती है छुट्टियां ही छुट्टियां है ।
जबकि यही मीडिया वाले ये नही बताते की विदेशों में 5 डे वर्किंग ही है
केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार के ज्यादातर विभागों में 5 डे ही वर्किंग है मतलब पूरे 53 शनिवार बन्द ,
7 दिन में 2 दिन की छुट्टी इसलिये दी जाती है जिससे एक व्यक्ति 5 दिन खूब एनर्जी से काम करे और 2 दिन नेक्स्ट 5 डे के लिए मेंटली तैयार रहे
बैंक में तो 5 डे पूरी तरह से इसलिए भी जरूरी है कि जहां एक तरफ हम मैक्सिमम बैंकिंग डिजिटल इंटरनेट बैंकिंग से करना चाहते हैं और देश को डिजिटल इंडिया बनाना चाहते हैं उसके लिए ग्राहकों को डिजिटल की ओर ले जाना पड़ेगा
कहते हैं आवश्यकता पर ही कुछ नई चीजों को लोग एक्सपेरिमेंट करते हैं , इसी तरह वीकेंड पर जब बैंक बन्द होता तो ना चाहते हुए भी लोग डिजिटल का इस्तेमाल करते
जहाँ 5 डे बैंकिंग से एक तरफ कर्मचारियों को मेन्टल थकान से थोड़ा छुटकारा मिलता वही डिजीटल ट्रांसफर लेन देन भी बढ़ता जो हमारे माननीय प्रधानमंत्री का सपना भी है ।।
उम्मीद है जिस तरह से पिछली बार यूनियन ने 2 शनिवार वाला समझाया था वैसे ही इस बार भी 5 डे बैंकिंग की जरूरत को टेक्निकली समझा पाएंगे और ये मुद्दा भी रख कर बात करने जाते होंगे 😁😁😁
क्योकि इनको तो सीपीसी में बुराई दिखती है पर मुझे तो सीपीसी की मांग करने पर 5 डे बैंकिंग का रास्ता साफ दिखाई दे रहा है ।।

