अभी अभी एक बैंकर बहन का पोस्ट देखा जिसमे किसी ग्राहक ने बेइज्जती करी " तेरी जैसी बहुत देखी है, चल चल काम कर और ज्यादा बोली तो , कहाँ है मैनेजर तेरा" और उसके बाद खाता बंद कराने की धमकी देकर मामले को बड़ा और अपनी बात को सही सिद्ध करने की कोशिश करी
यहाँ पर मैनेजर का रोल विचारणीय है जहाँ पर उसने ग्राहक की अभद्रतापूर्ण व्यवहार को सार्वजनिक ना करके अपने निर्दोष कर्मचारि पर ही गुस्सा कर दिया ,
क्या वो ऐसा करके मामले को टालना चाह रहे थे या भविष्य के लिए आस्वस्त थे कि अब वो ग्राहक ऐसा कुछ बिल्कुल भी नही करेगा या और ऐसे नए ग्राहक तैयार नही होंगे ।।
हम ग्राहक सेवा करते हैं और हमारे जैसे बहुत से डिपार्टमेंट है जो ग्राहक सेवा भी करते हैं और ग्राहकों को ग्राहकों के दायरे के अंदर कैसे रहा जाता है वो भी समझाते हैं ।।
मुख्य मुद्दा ये है कि क्या वजह है एक ग्राहक छोटा बड़ा कोई भी हो वो एक बैंकर के सम्मान के साथ खेलता है और वो कौन सी ताकत है जो उसे ऐसा करने पर सजा नही बल्कि समर्थन दे रही है , एक कर्मचारी के लिए वेतन से ज्यादा सम्मान प्रिय है और सम्मान ही अगर खोना हो तो पैसे कमाने के बहुत से रास्ते हैं वो बैंक में ही क्यो रहेगा क्या ये बात उस मैनेजर ने सोची या अन्य उच्च पदों पर बैठे लोग इस मुद्दे पर AC कमरे में बैठ कर चिंतन कर रहे हैं ।।
जवाब शायद ना है जिसका प्रमाण आये दिन बैंकरों के साथ मार पीट, बंधक बनाने की घटना , पैसा लूटने की घटना, गाली गलौज की संख्या में वृद्धि से देखा जा सकता है ।
आखिर क्यों नही कोई वकीलों को छेड़ता है, क्यो नही डॉक्टर से कोई बहस करता है, क्यो नहीं टीचरों का वेतन रुकवा के दिखाता है, क्यो नही वही ग्राहक एक सरकारी आफिस तहसील, पोस्ट ऑफिस, रेलवे, पुलिस में जाकर उपरोक्त शब्दो का इस्तेमाल नही करता है ,
उसकी वजह ये है कि अगर इन जगहों पर वो विरोध करेगा तो उसके विरूद्ध ना जाने कितने नए मुकदमे बन जाएंगे, ना जाने कितनी IPC की धाराएं लग जायेगी, ना जाने कितने महंगी वाली बीमारियों से रूबरू हो जाएंगे ...
ऐसा नही है कि बैंकिंग में सभी कर्मचारी बहुत अच्छे है और कामचोरी नही करते पर हा दावे के साथ ये कह सकता हूँ ये संख्या अन्य विभागों से बहुत ही कम है , अगर सब अच्छा है, हम आप सब ईमानदार है तो डर किस बात का रहता है जो ग्राहकों की गलत बातो का विरोध नही करते और उसे तब तक बैंकिंग से बॉयकॉट नही करते जब तक कि वो माफी ना मांगे अपनी गलती के लिए , इसके लिए हम आप सब को आगे आना होगा , कही पर किसी भी बैंकर के मान सम्मान को अगर ठेस पहुँचे तो पूरे वाकये की सच्चाई जानकर हमे उस निर्दोष बैंकर की मदद करनी होगी, हमे उसे बताना होगा कि तुम अकेले नही हो क्योकि जहाँ सम्मान की बात आये तो सभी बैंकर का सम्मान वहाँ जुड़ जाता है
हमे एकजुटता दिखाते हुए हर उस मैनेजर का , हर टॉप मैनेजमेंट का तब तक विरोध करना ही पड़ेगा जब तक कि वो हमारे सम्मान को बचाने के लिए कोई ठोस कदम ना ले और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति होने पर FIR की व्यवस्था पर मुहर ना लगा दे ।।
हमे इज्जत चाहिए, सम्मान चाहिए और ये सब अगर आप से ना हो पाए तो हमे फिर खुद से ही मामला निपटा लो कि बस छूट दे दी जाए फिर देखिएगा आधे से ज्यादा मामला on the spot हल हो जाएंगे और कोई एकाउंट भी बंद नही होगा 😎😎
यहाँ पर मैनेजर का रोल विचारणीय है जहाँ पर उसने ग्राहक की अभद्रतापूर्ण व्यवहार को सार्वजनिक ना करके अपने निर्दोष कर्मचारि पर ही गुस्सा कर दिया ,
क्या वो ऐसा करके मामले को टालना चाह रहे थे या भविष्य के लिए आस्वस्त थे कि अब वो ग्राहक ऐसा कुछ बिल्कुल भी नही करेगा या और ऐसे नए ग्राहक तैयार नही होंगे ।।
हम ग्राहक सेवा करते हैं और हमारे जैसे बहुत से डिपार्टमेंट है जो ग्राहक सेवा भी करते हैं और ग्राहकों को ग्राहकों के दायरे के अंदर कैसे रहा जाता है वो भी समझाते हैं ।।
मुख्य मुद्दा ये है कि क्या वजह है एक ग्राहक छोटा बड़ा कोई भी हो वो एक बैंकर के सम्मान के साथ खेलता है और वो कौन सी ताकत है जो उसे ऐसा करने पर सजा नही बल्कि समर्थन दे रही है , एक कर्मचारी के लिए वेतन से ज्यादा सम्मान प्रिय है और सम्मान ही अगर खोना हो तो पैसे कमाने के बहुत से रास्ते हैं वो बैंक में ही क्यो रहेगा क्या ये बात उस मैनेजर ने सोची या अन्य उच्च पदों पर बैठे लोग इस मुद्दे पर AC कमरे में बैठ कर चिंतन कर रहे हैं ।।
जवाब शायद ना है जिसका प्रमाण आये दिन बैंकरों के साथ मार पीट, बंधक बनाने की घटना , पैसा लूटने की घटना, गाली गलौज की संख्या में वृद्धि से देखा जा सकता है ।
आखिर क्यों नही कोई वकीलों को छेड़ता है, क्यो नही डॉक्टर से कोई बहस करता है, क्यो नहीं टीचरों का वेतन रुकवा के दिखाता है, क्यो नही वही ग्राहक एक सरकारी आफिस तहसील, पोस्ट ऑफिस, रेलवे, पुलिस में जाकर उपरोक्त शब्दो का इस्तेमाल नही करता है ,
उसकी वजह ये है कि अगर इन जगहों पर वो विरोध करेगा तो उसके विरूद्ध ना जाने कितने नए मुकदमे बन जाएंगे, ना जाने कितनी IPC की धाराएं लग जायेगी, ना जाने कितने महंगी वाली बीमारियों से रूबरू हो जाएंगे ...
ऐसा नही है कि बैंकिंग में सभी कर्मचारी बहुत अच्छे है और कामचोरी नही करते पर हा दावे के साथ ये कह सकता हूँ ये संख्या अन्य विभागों से बहुत ही कम है , अगर सब अच्छा है, हम आप सब ईमानदार है तो डर किस बात का रहता है जो ग्राहकों की गलत बातो का विरोध नही करते और उसे तब तक बैंकिंग से बॉयकॉट नही करते जब तक कि वो माफी ना मांगे अपनी गलती के लिए , इसके लिए हम आप सब को आगे आना होगा , कही पर किसी भी बैंकर के मान सम्मान को अगर ठेस पहुँचे तो पूरे वाकये की सच्चाई जानकर हमे उस निर्दोष बैंकर की मदद करनी होगी, हमे उसे बताना होगा कि तुम अकेले नही हो क्योकि जहाँ सम्मान की बात आये तो सभी बैंकर का सम्मान वहाँ जुड़ जाता है
हमे एकजुटता दिखाते हुए हर उस मैनेजर का , हर टॉप मैनेजमेंट का तब तक विरोध करना ही पड़ेगा जब तक कि वो हमारे सम्मान को बचाने के लिए कोई ठोस कदम ना ले और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति होने पर FIR की व्यवस्था पर मुहर ना लगा दे ।।
हमे इज्जत चाहिए, सम्मान चाहिए और ये सब अगर आप से ना हो पाए तो हमे फिर खुद से ही मामला निपटा लो कि बस छूट दे दी जाए फिर देखिएगा आधे से ज्यादा मामला on the spot हल हो जाएंगे और कोई एकाउंट भी बंद नही होगा 😎😎

