बैंकिंग अब पहले जैसी क्यो ना रही और वर्तमान में ये किस ओर जा रही है ।। - We Bankers

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Tuesday, January 15, 2019

बैंकिंग अब पहले जैसी क्यो ना रही और वर्तमान में ये किस ओर जा रही है ।।



जैसा कि शीर्षक ही है कि बैंकिंग अब पहले जैसी नही रही , आप सब इसमे इत्तेफाक रखते ही होंगे अगर बैंकिंग को कम से कम 20 साल पीछे से देखा जाए , इसके लिए आप खुद को 20 साल पीछे अपनी नजर से अपने परिवार की नजर से , अपनी शाखा के सीनियर स्टाफ की नजर से और ये सब कुछ ना हो तो हाल में ही चर्चित वेद माथुर की किताब पालमपुर से पढ़ कर इमेजिन कर सकते हैं।

ये वो समय था जब बैंक कर्मचारियों का काफी सम्मान होता था , उन्हें वाइट कालर वाले लोगो  की संज्ञा दी  जाती थी,  जहाँ बैंक में नौकरी करने के लिए लोगो ने इनकम टैक्स, शिक्षा विभाग, ग्राम पंचायत और यहाँ तक कि रेलवे के अच्छी पोस्ट तक को लोगो ने बैंक की नौकरी के लिए कुर्बान कर दिया , जिसका एक मुख्य कारण बैंक में अच्छा वेतन और उसके साथ अन्य मिलने वाली सुविधाएं भी थी ।।

उस समय यही bipartite था जो आजकल चल रहा, उस समय भी वेतन समझौता होता था पर वो हमेशा अन्य विभागों से ऊपर होता था, उस समय भी एक्स्ट्रा  काम होता था और ओवरटाइम भी मिलता था, उस समय भी डेपुटेशन पर भेजा जाता था और उसके पूरे बिल भी बिना रोक टोक के पास हो जाया करते थे,
उस समय भी यूनियन बाजी होती थी और हर मेंबर के लिए होती थी,

शायद इन्ही वजहों से अन्य डिपार्टमेंट के लोग बैंक वालो से जलते थे और अपने बच्चो को भी एक बैंक अफसर बनाने की चाहत रखते थे

फिर आखिर ऐसा क्या हुआ जो 20 साल पहले था वो चार्म अब नही रहा बैंकिंग का , अब 95% बैंकर अपने बच्चो को बैंक में आने के लिए प्रेरित नही करते सुने जा रहे हैं ।।

इसका सबसे मुख्य कारण जो मुझे लगता है वो ये की बैंक प्रॉफिट लॉस देखती है वैसे ही कर्मचारी भी अपना फायदा नुकसान देखने लगे थे ।

कृपया मेरी एक एक बात का जरूर गंभीरता पूर्वक उत्तर दीजिएगा

1. आखिर पहली बार जब bipartite में वेतन अन्य सरकारी कर्मचारियों से कम हुआ तो उसी समय आवाज क्यो नही उठायी गयी ??

2. आखिर जब पहली बार बिना ओवरटाइम दिए डरा कर शाखा में देर तक रोका गया उस समय विरोध क्यो नही दर्शाया गया

3. CBS के आने के बाद जिस हिसाब से काम बढ़ा उस हिसाब से नई नियुक्तियों के निकाले जाने तक CBS का बहिष्कार क्यो नही किया गया

4. ट्रांसफर पालिसी, spouce ग्राउंड पर , मेडिकल पर ट्रांसफर ना होने के पीछे की वजह क्यो नही पूछी गयी

5. कर्मचारियों को बीमा एजेंट बनाया गया और उन पर बीमा का काम करने से रोकने के लिए हड़ताल क्यो नही की गई

6. सरकार की सभी योजनाओं को मानने से पहले उनसे मोल भाव क्यो नही किया गया

7. काम के घण्टे तो लेबर लॉ में है पर ये 24*7 के नौकर है बैंक कर्मचारी ऐसे संदेश देने वालो को क्यो छोड़ दिया गया

8. जहाँ RBI के अनुसार एक शाखा तब तक नही खोली जा सकती जब तक कि कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या और व्यापक सुरक्षा के इंतजाम ना हो, फिर भी आज 80% शाखाये RBI के निर्देशों पर खरी नही उतरती और सुरक्षा व्यवस्था की बात ही क्या , आखिर कौन लोग जिम्मेदार है

9. जब एक बड़े लोन को सैंक्शन करने की पावर टॉप मैनेजमेंट को हैं तो रिकवरी के लिए जूनियर को भेजने से क्यो नही रोका गया

10. जब शाखा में कर्मचारियों से ज्यादा मशीन लगी हो और हर मशीन के खराब होने की जवाबदेही प्राइवेट वेन्डर से ज्यादा कर्मचारी की हो इसे किसने तय होने दिया

11. हर महीने चंदा तो काट लिया गया पर नेतानगरी में नेता किसकी शह पर बिना वोटो के बनने दिया गया

12 . जहाँ ग्राहक तुरंत चेयरमैन को शिकायत कर सकता हो पर कर्मचारी के लिये प्रॉपर चैनल की बात की वकालत करने वालो से क्यो नही पूछा गया

13 . जहाँ late नाईट तक जो बैठेगा वही काबिल कहलायेगा और जिसने वीकेंड पर अपने परिवार के साथ फ़ोटो डाल दी हो उसे P Review में कामचोर बताया जाएगा और बाकी लोगो के हँसने की वजह क्यो नही पूछी गयी

14. अपने हक़ के लिए जिसने पहली बार आवाज उठायी थी उसे सभी लोगो का समर्थन क्यो नही मिला था

15. जब चार्जेज कम करने के नाम पर कर्मचारियों के allowances, बिल्स, दीवाली halting TA DA और अब तो कैलेंडर डायरी में भी रोक लगा दी गयी तो इसका विरोध क्यो नही हुआ

ऐसे बहुत से अनगिनत सवाल है जिन्हें आपको अपने नेताओं, सीनियर से पूछने चाहिए कि आखिर क्या वजह थी जो ये सब उनके सामने होती चली गयी ,कही ये तो नही की मेरी नौकरी ही कितनी बची है, मेरा ट्रांसफर ना दूर हो जाये, कही ज्यादा काम ना पकड़ा दिया जाए, कही एक्सप्लेनेशन काल या मेमो ना दे दिया जाए इसलिए तो वो कही चुप ना थे जरूर पूछियेगा और क्या सवाल पूछना भी विरोध होता है इसे भी ..

धीरे धीरे हम लोगो को भी बैंक में आये हुए काफी समय हो गया और कही ना कहीं हम लोग भी डर के साथ आगे बढ़ रहे हैं और निरंतर बोझ से बाहर की दुनिया को देख नही पा रहे हैं ।।
पर यही तो फर्क होता है मानव में और जानवर में, यही तो एक अनमोल चीज दिमाग होती है हमारे पास जो हमे तार्किक शक्ति देती है कुछ भी  करने से पहले तो हम लोग क्यो नही इन सवालों के जवाब को ढूंढने का प्रयास करते हैं और

शपथ ले तब तक दिमाग बंद नही होने देंगे जब तक इन सवालों का जवाब ना मिल जाये ।।

एक 10 रुपिया दान दिए जाने वाले से सब पूछ लेते हो, 50 का रिचार्ज कराने मे भी कैशबैक ढूंढते हो तो भइया हर महीने 100 रुपिया जिन नेताओ को देते हो उनसे क्यो नही पूछते और जवाब अगर मिल जाये तो हमे भी बताइये क्योकि अब हम जैसे लोग बिना जवाब दिए 1 रुपिया भी नही देने वालो की जमात में जो हैं ।।😃😃
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