कहाँ जाता है किसी को जान से मारने से अच्छा उसको डरा डरा कर मार डालो, कोई FIR भी नही होगा ।। - We Bankers

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Friday, December 14, 2018

कहाँ जाता है किसी को जान से मारने से अच्छा उसको डरा डरा कर मार डालो, कोई FIR भी नही होगा ।।

"डर"

कहाँ जाता है किसी को मारने से भी अच्छा इलाज डर है, लोगो मे सत्य, निष्ठा, आत्मविश्वास कायम रहे और अपने कर्तव्यों से ना डगमगाए शायद इसलिए डर की पैदाइश की गई थी कि अगर वो कुछ गलत करेगा तो ईश्वर, अल्लाह, गॉड उसे उसके पापो की सजा देंगे ।।

ये डर ही हमे गलत कामों को करने से रोकता है और हम ये मान कर चलते है कि कोई ऊपर से हमे ही देख रहा है और कुछ गलत किया तो 100 कोड़े मिलेंगे ऊपर ...

पर भैया ई तो बैंकिंग ग्रुप है यहाँ डर माने कुछ और ही होता है, यहाँ डर की परिभाषा इतनी विस्तृत है कि एक मनोविज्ञानिक भी अगर 6 माह नौकरी कर ले तो अपनी सारी डिग्रिया भूल जाये ।।

आज हर शाखा में बैंकिंग के अलावा और भी बहुत काम होते है, हमे APY भी करना है, आधार लिंकिंग भी करना है, गैस  सब्सिडी काहे नही आ रही एक बैंकर ही जिम्मेदार है,  और इन्शुरन्स तो भूल ही गए साहब
 साथ ही  एक ग्राहक को संतुष्ट करने के लिए हममें सारी खूबियां भी होनी चाहिए जिससे कोई कंप्लेन ना हो ।।

RBO के टार्गेट्स, AO के टार्गेट्स, कॉरपोरेट के टार्गेट्स, हर दिन लॉगिन डे ...
आजकल तो शाखा में घुसने से पहले और रात में सोने के बाद तक लगातार बढ़ता ही जा रहा है,
इसकी वजह पता है क्या है, आपका केवल और केवल डर , इस डर की वजह से कई बार ग्राहकों को कई सारे प्रोडक्ट्स उनकी जरूरत उनके बचत को देखे बिना उनको पहना दिया जाता है,

कुछ लोग जो दिलेरी दिखाते है और जिनके पारिवारिक संस्कार उनको डर में रहकर काम करने की इजाज़त नही देते वो अकेले ही निकल पड़ते है पर कुछ ,

 अब मैं कुछ नही बल्कि ज्यादातर कायर बैंकर ही कहूंगा जो अपने उस साथी का साथ देने की बजाय उसे ही डर में रह कर जीने के झूठी फायदे बताने लगते हैं, और मैनेजमेंट की चमचागिरी कर के सोचते है कि मैंने तो डर की क्लास में एक और स्टूडेंट्स भर्ती कर लिया ।।

मैं मैनेजमेंट के दिये गए टार्गेट्स का कोई विरोध नहीं कर रहा पर क्या हर उस बेमतलब टारगेट जिसका की बैंकिंग या एक शाखा को कोई इनकम नही हो रही करना सही है, जहाँ स्टाफ शॉर्टेज की वजह से सुबह के 9 बजे आया एक कर्मचारी लगातार कई बार बिना लंच के भी काम करने के बावजूद रात के 8 9 बजे तक काम कर रहा है

अरे लेबर लॉ में भी काम के घंटे निर्धारित है तो बैंक में क्यो नही, टार्गेट्स देने से पहले क्या ये देखा जाता है बैंक की ओरिजिनल स्ट्रेंथ क्या है , या टार्गेट्स सेट करने पहले से ये मान कर चलते है कि ये पूरा नहीं होने वाला , अरे जब पता है कि पूरा नही हो पायेगा तो ठेका क्यो ले लिया तो असल मे सबसे ज्यादा डर उनको ही है ।।।

 कैसे आइये हम समझाते है

सबको चेयरमैन की ही कुर्सी दिखती है, उनको कमीशन ही अपना दिखता है , वैसे कई बार शाखा लेवल पर आने वाली दिक्कत वाकई में ऊपर तक नही भी पहुँच पाती है, तो वो अपने इस कमीशन को टार्गेट्स का नाम देकर और ट्रांसफर, रूरल पोस्टिंग, बिल , मेडिकल को रोकने का डर दिखा कर उल्टे पुल्टे टार्गेट्स पूरा करवाते है और हायर लेवल पर अपने को बहुत बड़ा मैनेजमेंट गुरु साबित करने की नापाक कोशिस करते है और 10 दिन उससे डबल टार्गेट्स का ठेका लेकर मैनेजमेंट गुरु की कुर्सी की रेस में नीचे वाले कर्मचारियों का जम कर शोषण करते है लेकिन कुछ अपवाद को छोड़ दिया जाए तो कर्मचारी की दिक्कत को कभी ऊपर नही बताते ,

कहाँ जाता है आदेश देने से बड़ा काम करने वाला होता है , इज्जत उसकी होनी चाहिए जो वाकई में अपने परिवार को भी दांव पर लगाकर टार्गेट्स पूरा करता है पर सच तो ये है उसे तो डर का मुकुट पहना दिया जाता है तो वो क्या अपने लिए और और अपने अधीनस्थ के लिए बात करेगा ।।

अंत मे बस इतना ही कहना चाहूंगा अपने बैंकर मित्रो से चाहे वो किसी भी लेवल पर हो , डर के साये से बाहर निकलिए क्योकि इसका कोई हाथ पैर नही और अगर आप सही है तो भगवान आपके साथ है ना फिर काहे का डर ...

मेरे विचार से डर को इस तरह कम किया जा सकता है -

1. डर को 100% अपने ऊपर लीजिये उसको किसी भी दूसरे को ट्रांसफर मत कीजिये

2. कुछ भी कार्य जो आपके आत्म सम्मान को चोट पहुचाने की कोशिस करे उसका खुलकर विरोध करे और ऐसे कार्य करने वाले का भरपूर समर्थन करे

3. अपने दोस्तों, यारो से शेयर जरूर करे , कहाँ जाता है भगवान ने दिमाग सबको बराबर दिया है और जब उसमे दोस्तो का लग जाये तो मंगल ग्रह भी पहुचा जा सकता है वो डर कौन से खेत की मूली है ।

4. आपके लिए सबसे पहले आपका परिवार है, परिवार को कष्ट पहुँचा कर पूरा किया कोई भी टार्गेट्स आपको आत्म संतुष्टि नही दे सकता

5. भगवान ने हमे गलत सही की पहचान और उसको साबित करने के लिए दिमाग दिया है, उसका भरपूर इश्तेमाल कीजिये ।

6. किसी ना किसी को आदर्श बनाइये और उनके अच्छी चीजों को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल कीजिये ।

7. अपने डर की वजहों चाहे छोटी या बड़ी हो उसको डायरी में लिखते जाइये और जो कदम आपने लिए हो उसको भी लिखते जाइये, एक महीने बाद खुद से आकलन कीजिये कि मेरे डर का ग्राफ किस ओर है

8. जब भी कोई फ़ोन आये टार्गेट्स के नाम पर उनसे हस कर, मुस्करा कर बात करिये क्योकि टार्गेट्स देने वाले को डरके बात करना चाहिए, यकीन मानिए फ़ोन करने वाले के डर को भी आप कुछ हल्का कर देंगे

9. गलत टार्गेट्स मेरा मतलब नॉन प्रोटिफबल टार्गेट्स से है उससे संबंधित सवाल कीजिये, उसकी वजह पूछिये , कुल मिला कर पूछना चालू रखिये जब तक अगला आदमी पूछने के लिए तैयार ना हो जाये

10. अपने से ऊपर के कर्मचारियों के साथ नीचे अधीनस्थ कर्मचारियों की पूरी बात जरूर सुनिए और उनकी परेशानियों को ऊपर तक पहुचाइए ..

एक बार डर से बाहर तो निकलये फिर देखिएगा बैंकिंग बहुत हसीन है , एक ऐसा चैलेंज है जो केवल और केवल हम कर सकते है, डर को भगाइये और मित्र बनाइये ।।

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