2016-17 के वित्तीय वर्ष के दौरान बैंक कर्मियों ने अपनी लगन और मेहनत से लगभग रुपए 1 लाख 59 हज़ार करोड़ रुपए का सकल लाभ कमा कर दिया जो कि 2015-16 के वित्तीय वर्ष से लगभग 22000 करोड़ ज़्यादा है - We Bankers

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Tuesday, December 11, 2018

2016-17 के वित्तीय वर्ष के दौरान बैंक कर्मियों ने अपनी लगन और मेहनत से लगभग रुपए 1 लाख 59 हज़ार करोड़ रुपए का सकल लाभ कमा कर दिया जो कि 2015-16 के वित्तीय वर्ष से लगभग 22000 करोड़ ज़्यादा है

2016-17 के वित्तीय वर्ष के दौरान बैंक कर्मियों ने अपनी लगन और मेहनत से लगभग रुपए 1 लाख 59 हज़ार करोड़ रुपए का सकल लाभ कमा कर दिया जो कि 2015-16 के वित्तीय वर्ष से लगभग 22000 करोड़ ज़्यादा है
। अब बैंकों ने डूबने वाले ऋणों के लिए लगभग रुपए 1 लाख 70 हज़ार करोड़ का प्रावधान कर लिया । नतीजन बैंकें लगभग रूपए 11000 करोड़ के घाटे में आ गयीं । अब आईबीए और सरकार इसी घाटे की दुहाई देते हुए और इसे आधार बना कर बैंक कर्मियों की वेतन बढ़ोत्तरी में न्यायोचित बढ़ोत्तरी करने से इंकार कर रही हैं । अब सवाल है कि वो कौन लोग हैं जो बैंकों से रुपए 1 लाख 59 हज़ार करोड़ का ऋण ले गए और उसे चुका नहीं रहे और उनकी इस चूक को आधार बना कर सरकार और IBA न्यायोचित वेतन बढ़ोत्तरी से इंकार कर रही हैं ? सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद भी बड़े बकाएदारों के नाम उजागर नहीं कर रही । बैंक कर्मियों को जो सच्चाई मीडिया में मौजूद है-उसे न केवल अपने दिल और दिमाग़ में बैठा लेना चाहिए बल्कि उसे जनता के बीच ले कर जाना चाहिए । एक उदाहरण तो मैं ही दे देता हूँ ।

यह उदाहरण है ग़रीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे चर्चित अदानी जी का । वर्तमान सरकार के सत्ता में आते ही अदानी इंटरप्राइजेज और स्‍टेट बैंक ऑफ इंडि‍या (एसबीआई) के बीच 1 अरब डॉलर (करीब 6 हजार करोड़ रुपए) लोन के लि‍ए एमओयू नवम्बर 2014 में साइन हुआ । अदानी को यह लोन ऑस्‍ट्रेलि‍या में कोल माइन शुरू करने के लि‍ए दि‍या गया ।यह कि‍सी भारतीय बैंक द्वारा वि‍देशी प्रोजेक्‍ट के लि‍ए दि‍या गया सबसे बड़ा लोन था, जब यह ऋण दिया गया उस वक़्त अदानी इंटरप्राइजेज की नेटवर्थ मात्र 10034 करोड़ रुपए थी जबकि अदानी ग्रूप की कुल नेटवर्थ रुपए 27000 करोड़ -अदानी इंटरप्राइजेज 10034 करोड़ रुपए, अदानी पावर का नेटवर्थ 7,787 करोड़ रुपए और अदानी पोर्ट का नेटवर्थ 9,335 करोड़ रुपए । अब सवाल यह भी है कि जब यह ऋण दिया गया तब अदानी ग्रूप को पहले से दिए गए ऋण की स्थिति क्या थी ? 30 सि‍तंबर 2014 तक कंपनी का लॉन्‍ग टर्म डेट 55,364.94 करोड़ रुपए था जबकि‍ शॉर्ट टर्म डेट 17,267.43 करोड़ रुपए था ।  इस हि‍साब से कंपनी पर कुल कर्ज 72,632.37 करोड़ रुपए हो चुका था । अब सवाल यही है कि‍ एसबीआई ने इतना बड़ा कर्ज ऐसी कंपनी को क्‍यों दि‍या जो पहले से ही कर्ज के बोझ में दबी हुई थी ? जिनके राजनीति का चश्मा लगा है उनके लिए इस वास्तविकता का लिंक मैं दे रहा हूँ ।

https://www.bhaskar.com/news/NR-BANK-why-sbi-provides-1-lakh-cr-dollar-loan-to-30k-cr-adani-group-4811332-NOR.html

अब सरकार तो उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद भी नाम बताने को तैयार नहीं तो जागरूक लोगों ने सोचा कि सच्चाई जानने का एक अधिकार तो सूचना के अधिकार के ज़रिए है ही उसके अन्तर्गत पूँछ लेते हैं - जानकारी माँगी गई और लीजिए सूचना आयुक्त ने भी इस जानकारी को देने से मना कर दिया । देखें ख़बर :

https://economictimes.indiatimes.com/industry/banking/finance/banking/sbi-records-of-loans-to-gautam-adani-firms-cannot-be-disclosed-central-information-commission/articleshow/55648166.cms

बात यहीं ख़त्म नहीं होती -एक ख़बर यह भी है कि स्टेट बैंक देश के सबसे बड़े ग़रीब अदानी साहब के ऋण का एक हिस्सा माफ़ करना चाहती थी -मामला उच्चतम न्यायालय में चला गया जिसने ऐसा करने पर रोक लगा दी , अब ख़बर यह है कि स्टेट बैंक ने उच्चतम न्यायालय में गुहार की है कि रुपए 35000 करोड़ के ऋण waive यानि माफ़ करने की उसे अनुमति दी जाय । देखें ख़बर :

http://energyinfrapost.com/sbi-approaches-sc-waive-portion-adani-tata-essar-groups-rs-35000-cr-debt/

वर्ष 2015 में हुए दसवें द्विपक्षीय समझौते के ज़रिए बैंक कर्मियों की वेतन वृद्धि का ख़र्च है रुपए 4725 करोड़ मात्र । यानि देश के सबसे बड़े ग़रीब अदानी जी अकेले पर्याप्त हैं दस लाख बैंक कर्मियों और उनके परिवार के सपनों को नेस्तनाबूद करने के लिए -सरकार और आईबीए को बैंक कर्मियों की न्यायोचित माँग को यह कह कर ख़ारिज करवाने के लिए कि देने के लिए धन नहीं है ।

ऐसे कितने उदाहरण हैं -पूँजीपतियों से यारी के बैंक कर्मियों से मक्कारी के ।
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