एक बैंकर आखिर कब जागेगा
रोज़ कोई ना कोई बुरी खबर सुनने में आ रही है। कही ना कही इसके पीछे सब कुछ सहना है और कोई शिकायत किसी से नही करनी है ऐसा मानकर बैंक कर्मचारी अंदर ही अंदर घुटते जा रहे है ,
अरे आजकल घर मे काम करने वाले नौकरो से भी कोई ऊंची आवाज में नही बोल सकता है और कोई एक्स्ट्रा काम कर दे वो भी बिना अतिरिक्त पैसो के तो भूल ही जाओ कि करवा पाओगे , बिना बताए नागा करना उनका जन्मसिद्द अधिकार है और त्योहार पर त्योहारी ना दिया तो पूरे मोहल्ले में आपकी बेइज्जती तय है ।।
अब आओ बैंकर्स पर, एक नौकर जो अस्थायी है जिसे हम पैसा देते है उसके बावजूद उनका ये रुतबा है और एक बैंकर बहुत ही कठिन परीक्षा पास करके बैंक जॉइन करता है, और ये सबको पता है कि उसको उसकी काबिलियत से कम पैसा मिलता है,
बिना वजह उल जलूल बाते सुनता है ग्राहकों की अब तो फालतू टार्गेट्स के लिए मैनेजमेंट की वो भी गालियो के साथ, देर तक रुक कर काम निपटाता है बिना ओवरटाइम मिले , अरे CL छोड़ो छुट्टी के दिन भी बैंक आकर काम करता है तो नागा करना तो बैंकर्स की डिक्शनरी में है ही नही, त्योहार में जहाँ दूसरे डिपार्टमेंट बोनस देते है वही एक बैंक कर्मचारी बिना किसी त्योहार अलाउंस के बाकी दिनों से ज्यादा काम करता है और त्यौहार के दिन जहाँ सब लोग परिवार के साथ एन्जॉय करते है एक बैंकर उस समय काम निपटा कर घर लौट रहा होता है ।
इन सबके बावजूद भी बैंक (मैनेजमेंट) क्या देती है उसे गाली , AC में बैठे हुए मैनेजमेंट के चमचे जो insurance की दलाली करके विदेश घूमते है और फ्री में मोटा वेतन पा रहे है , NPA के लिए जिम्मेदार एक काम करने वाले बैंक कर्मचारी को ठहराते है,
यूनियन के दलाल चंदे हम से लेकर हमको ही बताते है कि वेतन उन्हें बैंक घाटे के बाद भी दे रही है तो यूनियन के चमचो क्यो नही यूनियन फी और लेवी लेना नही छोड़ते हो , तुम तो दलाल की श्रेरी में भी नही आते क्योकि वो भी अगर पैसा लेता है तो ईमानदारी से काम तो करता है पर तुम तो गिरकीट से भी खतरनाक हो जो एक तरफ से लेवी लेते हो और दूसरी तरफ NPA का रोना रोते हो ।।
आज बैंकर्स में काफी युवा है और सही कहा गया है परिवर्तन ये क्रांतिकारी युवा ही लाएंगे , पर अब भी कुछ लोग दूर से ही तमाशा देखेंगे और यहाँ ज्ञान देंगे कि हम तुम्हारे साथ दूर से खरे रहेंगे पर असल मे मैनेजमेंट के तलवे चाटेंगे ... परिवर्तन आने पर हम तुम्हारे भी चाटेंगे क्योकि चाटना इनका धर्म बन गया है ।
तो ऐसे लोगो से गुजारिश है मुझे एक ऐसे ही नौकर की जरूरत है जो बिना उ आ किये सभी काम करे ... एक बात का भरोसा मैं देता है मैं बैंक की तरह उसके साथ ऐसा कोई भी निर्दयतापूर्वक काम नही करवाऊंगा और ना ही उसके मान सम्मान को ठेस पहुँचाऊँगा की उसे आत्महत्या करना पड़े ।।।
रोज़ कोई ना कोई बुरी खबर सुनने में आ रही है। कही ना कही इसके पीछे सब कुछ सहना है और कोई शिकायत किसी से नही करनी है ऐसा मानकर बैंक कर्मचारी अंदर ही अंदर घुटते जा रहे है ,
अरे आजकल घर मे काम करने वाले नौकरो से भी कोई ऊंची आवाज में नही बोल सकता है और कोई एक्स्ट्रा काम कर दे वो भी बिना अतिरिक्त पैसो के तो भूल ही जाओ कि करवा पाओगे , बिना बताए नागा करना उनका जन्मसिद्द अधिकार है और त्योहार पर त्योहारी ना दिया तो पूरे मोहल्ले में आपकी बेइज्जती तय है ।।
अब आओ बैंकर्स पर, एक नौकर जो अस्थायी है जिसे हम पैसा देते है उसके बावजूद उनका ये रुतबा है और एक बैंकर बहुत ही कठिन परीक्षा पास करके बैंक जॉइन करता है, और ये सबको पता है कि उसको उसकी काबिलियत से कम पैसा मिलता है,
बिना वजह उल जलूल बाते सुनता है ग्राहकों की अब तो फालतू टार्गेट्स के लिए मैनेजमेंट की वो भी गालियो के साथ, देर तक रुक कर काम निपटाता है बिना ओवरटाइम मिले , अरे CL छोड़ो छुट्टी के दिन भी बैंक आकर काम करता है तो नागा करना तो बैंकर्स की डिक्शनरी में है ही नही, त्योहार में जहाँ दूसरे डिपार्टमेंट बोनस देते है वही एक बैंक कर्मचारी बिना किसी त्योहार अलाउंस के बाकी दिनों से ज्यादा काम करता है और त्यौहार के दिन जहाँ सब लोग परिवार के साथ एन्जॉय करते है एक बैंकर उस समय काम निपटा कर घर लौट रहा होता है ।
इन सबके बावजूद भी बैंक (मैनेजमेंट) क्या देती है उसे गाली , AC में बैठे हुए मैनेजमेंट के चमचे जो insurance की दलाली करके विदेश घूमते है और फ्री में मोटा वेतन पा रहे है , NPA के लिए जिम्मेदार एक काम करने वाले बैंक कर्मचारी को ठहराते है,
यूनियन के दलाल चंदे हम से लेकर हमको ही बताते है कि वेतन उन्हें बैंक घाटे के बाद भी दे रही है तो यूनियन के चमचो क्यो नही यूनियन फी और लेवी लेना नही छोड़ते हो , तुम तो दलाल की श्रेरी में भी नही आते क्योकि वो भी अगर पैसा लेता है तो ईमानदारी से काम तो करता है पर तुम तो गिरकीट से भी खतरनाक हो जो एक तरफ से लेवी लेते हो और दूसरी तरफ NPA का रोना रोते हो ।।
आज बैंकर्स में काफी युवा है और सही कहा गया है परिवर्तन ये क्रांतिकारी युवा ही लाएंगे , पर अब भी कुछ लोग दूर से ही तमाशा देखेंगे और यहाँ ज्ञान देंगे कि हम तुम्हारे साथ दूर से खरे रहेंगे पर असल मे मैनेजमेंट के तलवे चाटेंगे ... परिवर्तन आने पर हम तुम्हारे भी चाटेंगे क्योकि चाटना इनका धर्म बन गया है ।
तो ऐसे लोगो से गुजारिश है मुझे एक ऐसे ही नौकर की जरूरत है जो बिना उ आ किये सभी काम करे ... एक बात का भरोसा मैं देता है मैं बैंक की तरह उसके साथ ऐसा कोई भी निर्दयतापूर्वक काम नही करवाऊंगा और ना ही उसके मान सम्मान को ठेस पहुँचाऊँगा की उसे आत्महत्या करना पड़े ।।।

