क्योकि भौकाली आज नही तो कल, खत्म तो होनी ही है 😂😂😂😂
कहते है पड़ोसी अगर मिलनसार हो तो बैंक वाले कि नौकरी घर अच्छी चल जाती है( मेरा मतलब आलू, तरकारी, बिजली पानी से है 😂😂) पर अगर पड़ोसी का लड़का भी बैंक में सेलेक्ट हो जाये तो रही सही इज्जत भी किश्त में बचानी पड़ती है
तो बात हमारे पड़ोसी शर्मा जी के लड़के की है जिसका 1 साल पहले बैंक में सेलेक्शन हो गया , माँ बाप ने खूब लड्डू बाते , रामायण बैठाया दावते दी और हर मंदिर में जाकर 21 रुपया का नारियल फोड़ कर आये, खुशी उनको एक तरफ शायद ये थी कि बेटे की रेपुटेड बैंक में नौकरी लग गयी या दूसरी तरफ हमारी भौकाली देख कर सोचते होंगे कि अब उनके भी दिन आ गए ।।।
अब भौकाली से तात्पर्य मेरा रोज सुबह नहा धो कर अपनी लोन वाली कार से 9 बजे घर से निकल जाना, 8 बजे के बाद ज्यादातर या कभी कभी आधी आधी रात में आना , होटल से खाना आर्डर कर देना और सुबह वही खाना को गाय को खाते देखना ( कई बार बिना खाये जो सो गए थे ) सब्जी में बिना मोलभाव के लेना क्योकि टाइम नही होता था और हर बार नई नई नोट निकालना पर्स से ,
अब एक बैंकर के लिए तो थी ये सब मजबूरी पर पड़ोसन को लगता था ये सब भौकाली , कितनी बार पड़ोसन के लड़के से कहा SSC कर ले, कोई और तैयारी कर ले पर उसे तो मेरी भौकाली पसंद थी , अब जब आ गया है तो पूरी पोल पट्टी खोल के रख दिया और भौकाली मेरी सिसक के मर गयी ।।
अब उस बेचारे की भी कोई गलती नही है, हम भी अपने समय मे जब कम्पटीशन की तैयारी किया करते थे तो हमारे पिताजी के एक मित्र बैंक में नौकरी करते थे, ये बड़ा सा आलीशान मकान, हर कमरे में रंगीन TV, AC तो ऐसे लगे थे कि गरमी की छुट्टियां वही बीतती थी , साल में उनका एक बार जरूर कही बाहर छुटियाँ मनाने बाहर जाना ।।
ऐसा नही की केवल अंकल का बल्कि जब कभी उस जमाने मे बैंक जाते थे तो कर्मचारियों का रुतबा देख कर ही दंग रह जाते थे, (ये उस समय की बात है जब CBS नही था 2005 के आस पास) लोग मैनेजर के पास जाने की हिम्मत ही नही जुटा पाते थे और कई बार मैंने लोगो को केबिन के बाहर चप्पल उतार कर अंदर जाते हुए भी देखा था, बैंक वालो से कोई बहस करे शायद उस समय कोई सोच भी नही सकता था मैं, पैसे लेने के लिए कम से कम 3 काउंटर का सफर तय करना होता था, स्टाफ की संख्या देख कर लगता था कि आजकल तो इतने स्टाफ 10 km के दायरे के सारे बैंक को भी मिला दो तो नही होंगे , एक साइड में लेन देन वाले हुआ करते थे और दूसरी बिल्डिंग में लोन वाले,
हा लोन वाले सर् से परिचय हो गया था अंकल की वजह से तो जब हम जाते थे तो 100 ग्राम काजू जरूर खा कर आते थे , मिठाई भी रहती थी पर कलाकंद पर ही मेरी नजर रहती थी , फिलहाल नास्ता अच्छे से ही कर के आते थे , शाखा प्रबंधक भी बहुत अच्छे से लेकिन किसी थानेदार स्टाइल में ही ग्राहकों को समझाते थे, हा एक चपरासी भी हुआ करता था असल मे 2 3 होते थे जो काम बताने के बाद ही तय करते थे कि शाखा प्रबंधक से मिलाया जाए या बाहर से ही निपटा दिया जाए ।।
हमारे पिताजी भी जब देखो अंकल की ही बात किया करते थे कि देखो कितनी कम उम्र में उसने घर बंगला जमीन जायदाद सब बना लिया , उनके बच्चे शहर के सबसे प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ते थे वो बात अलग है उसी स्कूल में हम भी थे और पढ़ाई में अव्वल रहते थे उनसे , पिताजी हमारे अक्सर FD से रिलेटेड, टैक्स और बचत संबंधी राय लेते थे और वो भी बिना किसी बहाने के पूरी मदद करते थे, पिताजी ने एक बार ये भी बताया था कि इनका वेतन भी एक IAS ऑफिसर से ज्यादा है ,
बस यही सब देख कर हम भी फिसल गए और लग गए दिन रात बैंक की तैयारी में , और आ गए बैंक में , पर ये क्या अरे ये क्या हुआ था मेरे साथ, इतना बड़ा धोखा, उस दिन पूरी रात मुझे नींद नही आई जब मुझे पहली सैलरी 5 अंको को भी क्रॉस नही कर पाई ।।। मैं दिन भर अपने सभी बैच के दोस्तो को फोन करके कन्फर्म करता रहा पर उधर से भी यही जवाब आ रहा था भाई धोका हो गया है अपने साथ
कुछ दिन बस उसी गम की हालत में नौकरी करते रहे , पर जाने का तो टाइम था लेकिन लौटने का बिल्कुल नही, SSC Mains का एडमिट कार्ड जब आया तो याद आया कि अरे अभी भी समय है लग जाओ, तो लग गए और mains क्लियर हो भी गया पर ये ऑडिट को भी इंटरव्यू के बीच मे ही आना था हमने सोचा छुट्टी ले लेते है पर बताया गया कि प्रोबेशन में छुट्टी वो भी ऑडिट ब्रांच में कभी नही मिल सकती ...
नतीजा हम इंटरव्यू तो दिए SSC का पर रिजल्ट में फुस्स हो गए , आगे एग्जाम तो बहुत दिए पर बैंक की नौकरी कर के आने के बाद सच बता रहा हूं हिम्मत जवाब दे जाती थी , फिर हमने इसी को अपनी कर्मस्थली मान लिया और पूरी ईमानदारी के साथ लग गए बैंकिंग सेवा में ।।
हमको तो कोई बताया नही था नए जोइनी का बैंक में वेतन पर हमने कितना समझाया था पड़ोसी के लड़के को पर वो नही माना , कहता था महेंद्रा कोचिंग वाले तो 68000 बताते है और बाकी का ऊपरी तो कुछ होगा ही, हम भी बस उसकी भोली सी खुसी को पर्दाफास करने की हिम्मत नही जुटा पाए नतीजा सब के सामने है , सोचे थे भौकाल बना कर कुछ दिन और जिएंगे पर अब तो बैंक की सब हकीकत इसको पता ही लग जायेगी ।।।
इसलिए उस दिन से हमने भी सोचा और आप भी की सब को ये जरूर बताएं कि बैंक की नौकरी चुनौतीपूर्ण से भरी है और यहाँ रिस्क के हिसाब से वेतन बिल्कुल नही है ।।
क्योकि भौकाली आज नही तो कल, खत्म तो होनी ही है 😂😂😂😂
कहते है पड़ोसी अगर मिलनसार हो तो बैंक वाले कि नौकरी घर अच्छी चल जाती है( मेरा मतलब आलू, तरकारी, बिजली पानी से है 😂😂) पर अगर पड़ोसी का लड़का भी बैंक में सेलेक्ट हो जाये तो रही सही इज्जत भी किश्त में बचानी पड़ती है
तो बात हमारे पड़ोसी शर्मा जी के लड़के की है जिसका 1 साल पहले बैंक में सेलेक्शन हो गया , माँ बाप ने खूब लड्डू बाते , रामायण बैठाया दावते दी और हर मंदिर में जाकर 21 रुपया का नारियल फोड़ कर आये, खुशी उनको एक तरफ शायद ये थी कि बेटे की रेपुटेड बैंक में नौकरी लग गयी या दूसरी तरफ हमारी भौकाली देख कर सोचते होंगे कि अब उनके भी दिन आ गए ।।।
अब भौकाली से तात्पर्य मेरा रोज सुबह नहा धो कर अपनी लोन वाली कार से 9 बजे घर से निकल जाना, 8 बजे के बाद ज्यादातर या कभी कभी आधी आधी रात में आना , होटल से खाना आर्डर कर देना और सुबह वही खाना को गाय को खाते देखना ( कई बार बिना खाये जो सो गए थे ) सब्जी में बिना मोलभाव के लेना क्योकि टाइम नही होता था और हर बार नई नई नोट निकालना पर्स से ,
अब एक बैंकर के लिए तो थी ये सब मजबूरी पर पड़ोसन को लगता था ये सब भौकाली , कितनी बार पड़ोसन के लड़के से कहा SSC कर ले, कोई और तैयारी कर ले पर उसे तो मेरी भौकाली पसंद थी , अब जब आ गया है तो पूरी पोल पट्टी खोल के रख दिया और भौकाली मेरी सिसक के मर गयी ।।
अब उस बेचारे की भी कोई गलती नही है, हम भी अपने समय मे जब कम्पटीशन की तैयारी किया करते थे तो हमारे पिताजी के एक मित्र बैंक में नौकरी करते थे, ये बड़ा सा आलीशान मकान, हर कमरे में रंगीन TV, AC तो ऐसे लगे थे कि गरमी की छुट्टियां वही बीतती थी , साल में उनका एक बार जरूर कही बाहर छुटियाँ मनाने बाहर जाना ।।
ऐसा नही की केवल अंकल का बल्कि जब कभी उस जमाने मे बैंक जाते थे तो कर्मचारियों का रुतबा देख कर ही दंग रह जाते थे, (ये उस समय की बात है जब CBS नही था 2005 के आस पास) लोग मैनेजर के पास जाने की हिम्मत ही नही जुटा पाते थे और कई बार मैंने लोगो को केबिन के बाहर चप्पल उतार कर अंदर जाते हुए भी देखा था, बैंक वालो से कोई बहस करे शायद उस समय कोई सोच भी नही सकता था मैं, पैसे लेने के लिए कम से कम 3 काउंटर का सफर तय करना होता था, स्टाफ की संख्या देख कर लगता था कि आजकल तो इतने स्टाफ 10 km के दायरे के सारे बैंक को भी मिला दो तो नही होंगे , एक साइड में लेन देन वाले हुआ करते थे और दूसरी बिल्डिंग में लोन वाले,
हा लोन वाले सर् से परिचय हो गया था अंकल की वजह से तो जब हम जाते थे तो 100 ग्राम काजू जरूर खा कर आते थे , मिठाई भी रहती थी पर कलाकंद पर ही मेरी नजर रहती थी , फिलहाल नास्ता अच्छे से ही कर के आते थे , शाखा प्रबंधक भी बहुत अच्छे से लेकिन किसी थानेदार स्टाइल में ही ग्राहकों को समझाते थे, हा एक चपरासी भी हुआ करता था असल मे 2 3 होते थे जो काम बताने के बाद ही तय करते थे कि शाखा प्रबंधक से मिलाया जाए या बाहर से ही निपटा दिया जाए ।।
हमारे पिताजी भी जब देखो अंकल की ही बात किया करते थे कि देखो कितनी कम उम्र में उसने घर बंगला जमीन जायदाद सब बना लिया , उनके बच्चे शहर के सबसे प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ते थे वो बात अलग है उसी स्कूल में हम भी थे और पढ़ाई में अव्वल रहते थे उनसे , पिताजी हमारे अक्सर FD से रिलेटेड, टैक्स और बचत संबंधी राय लेते थे और वो भी बिना किसी बहाने के पूरी मदद करते थे, पिताजी ने एक बार ये भी बताया था कि इनका वेतन भी एक IAS ऑफिसर से ज्यादा है ,
बस यही सब देख कर हम भी फिसल गए और लग गए दिन रात बैंक की तैयारी में , और आ गए बैंक में , पर ये क्या अरे ये क्या हुआ था मेरे साथ, इतना बड़ा धोखा, उस दिन पूरी रात मुझे नींद नही आई जब मुझे पहली सैलरी 5 अंको को भी क्रॉस नही कर पाई ।।। मैं दिन भर अपने सभी बैच के दोस्तो को फोन करके कन्फर्म करता रहा पर उधर से भी यही जवाब आ रहा था भाई धोका हो गया है अपने साथ
कुछ दिन बस उसी गम की हालत में नौकरी करते रहे , पर जाने का तो टाइम था लेकिन लौटने का बिल्कुल नही, SSC Mains का एडमिट कार्ड जब आया तो याद आया कि अरे अभी भी समय है लग जाओ, तो लग गए और mains क्लियर हो भी गया पर ये ऑडिट को भी इंटरव्यू के बीच मे ही आना था हमने सोचा छुट्टी ले लेते है पर बताया गया कि प्रोबेशन में छुट्टी वो भी ऑडिट ब्रांच में कभी नही मिल सकती ...
नतीजा हम इंटरव्यू तो दिए SSC का पर रिजल्ट में फुस्स हो गए , आगे एग्जाम तो बहुत दिए पर बैंक की नौकरी कर के आने के बाद सच बता रहा हूं हिम्मत जवाब दे जाती थी , फिर हमने इसी को अपनी कर्मस्थली मान लिया और पूरी ईमानदारी के साथ लग गए बैंकिंग सेवा में ।।
हमको तो कोई बताया नही था नए जोइनी का बैंक में वेतन पर हमने कितना समझाया था पड़ोसी के लड़के को पर वो नही माना , कहता था महेंद्रा कोचिंग वाले तो 68000 बताते है और बाकी का ऊपरी तो कुछ होगा ही, हम भी बस उसकी भोली सी खुसी को पर्दाफास करने की हिम्मत नही जुटा पाए नतीजा सब के सामने है , सोचे थे भौकाल बना कर कुछ दिन और जिएंगे पर अब तो बैंक की सब हकीकत इसको पता ही लग जायेगी ।।।
इसलिए उस दिन से हमने भी सोचा और आप भी की सब को ये जरूर बताएं कि बैंक की नौकरी चुनौतीपूर्ण से भरी है और यहाँ रिस्क के हिसाब से वेतन बिल्कुल नही है ।।
क्योकि भौकाली आज नही तो कल, खत्म तो होनी ही है 😂😂😂😂

