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Tuesday, December 11, 2018

बैंको में भी आ गयी है राजनीति ... फ़ूट डालो और राज करो

"राजनीति"

राजनीति का संधि-विच्छेद करने पर
राज + नीति
दो शब्द निकल कर आते है। राज मतलब राज्य, प्रदेश, देश और नीति मतलब नियम कायदे, संविधान etc तो राजनीति माने हुआ .. प्रदेश देश मे संविधान, नियम कायदे को बरकरार रखने को राजनीति और जिसको इसे बरकरार रखना है उसे राजनेता कहते है

पर कमेंट बॉक्स में जरूर बताइयेगा आप लोग राजनीति को किस अंदाज़ से डिफाइन करते थे ।।

असल मे सत्ता की लालसा, पैसो का घमंड और सबसे बलवान बनने की होड़ में राजनीति की परिभाषा ही बदल दी है ।। आज किसी भी राजनीतिक को हम ये मानने को तैयार नही कि ये राजनीति यहाँ सविंधान नियम कायदे के अंदर करने आया है ...

अब चुकी ये बैंकर्स पेज है तो यहाँ बैंक की राजनीति को उजागर करते है,

ये राजनीति शाखा लेवल से ही शुरू हो जाती है जहां अपने ही स्टाफ के खिलाफ अपने ही अधिकारियों से चुगली की जाती है , उसकी किसी कमी या पूर्व में करी कोई गलती को जग के सामने उजागर करके बिना टेबलेट खाये सोने वाले लगभग हर शाखा में मिल जाएंगे ।।

कुछ शाखा प्रबंधक भी राजनीति करते है, जब स्टाफ को कोई काम हो या किसी दिन 1 घंटे पहले निकलना हो उससे थोड़ा पहले एक काम ले कर देना की ये बहुत जरूरी काम है और नही किया तो भूकंप आ जाएगा RBO में और मैं बता दूंगा की उसको कही काम था इसलिए 1 घंटे पहले चला गया ... अब बैंककर्मी 1 घंटे पहले तो जा नही सकते तो लो भइया वो बैच पोस्टिंग में लग जाता है और कुछ ऐसा फस जाता है कि बाकी दिनों से भी 10 मिनट देर से निकलता है, शाखा प्रबंधक अपनी इस जीत को सिगरेट के छल्ले बना कर ऐसे सेलिब्रेट करता है जैसे अब वो बैंक कर्मी उसको कभी नही फ़सायेगा ।।

तो देखा भाइयो जो काम आसानी से हो जाता अगर वो bm एक घंटा पहले उसको छोड़ देता पर यहाँ पहले उसने राजनीति की अब वो बैंक कर्मी भी करेगा क्योकि एक बैंक कर्मी हर उधारी को सूत समेत उतारता है और 3 महीने के अंदर ही उतारता है जिससे NPA न होने पाए राजनीति ।

यही काम RBO, ZO, LHO हर जगह हो रहा है, एक बैंककर्मी का दुश्मन कोई दूसरा बैंककर्मी ही बना है और उसके साथ राजनीति खेल रहा है

हमारी यूनियन को तो इसमें 50 साल से भी ज्यादा का अनुभव है और इतना उनके खून में घुस गया है कि मच्छर भी उनको काटने के बाद अपने ही मच्छर भाई को काट लेता है ।।

राजनीति अगर स्वच्छ ईमानदारी से की जाए तो इसमें सभी मानव सभ्यता का विकास है लेकिन अगर केवल सत्ता के लिए किया जाए तो आपका विनाश तय है .. आप अपने परिवार दोस्त यार सबसे दूर हो जाएंगे और अनगिनत राजनीतिग्यो के बीच घिर कर अपनी चाल चलने का बस इंतजार करेंगे ।।

इसलिए मेरी सभी बैंककर्मियों से गुजारिश है कि कम से कम शाखा लेवल पर किसी भी राजनीति का समर्थन ना करे, गलत को गलत और ना माने ना बोलना सीखे।।

एक अपील ...
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