आज कुछ बाते इनकम टैक्स पर हो जाये ...
अभी हाल ही में इनकम टैक्स द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि नोटबन्दी के बाद से और बैंकों में पैन कार्ड, आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से ITR भरने और इनकम टैक्स के स्लैब में आने वालों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही है ...
सरकार इसे अपनी उपलब्धि में जोर शोर से गिना रही है की चोरबाजारी खत्म करके सब को इनकम टैक्स के दायरे में ले आयी है ।।
लेकिन इनकम टैक्स की न्यूनतम सीमा को 2,50,000 ही रखा गया है ।।
जिस हिसाब से महगांई बढ़ रही है उस हिसाब से ये सीमा लगभग सभी मिडिल क्लास यहाँ तक कि लोअर क्लास को भी कवर कर रही है ।।
अब सरकार की नीयत पर आते है
2.50 लाख से 5 लाख तक 5%
5 लाख से 10 लाख तक 20%
और 10 लाख से अनलिमिटेड 30%
इसका मतलब 11 लाख वाला भी 30% और 11 करोड़ वाला भी 30%
आखिर क्यों ??
आज लगभग सभी नौकरीपेशा लोग 5 से 10 लाख वाले स्लैब में आते है, सरकार ने इसे 20% से कम ना करके मिडल क्लास को टैक्स के नाम पर गहरी चोट पहुचाई है
अब केवल टैक्स पर आते है, हमे वेतन टैक्स काट कर दिया जाता है, अब उसमें से भी बचाये गए पैसे FD, RD पर भी टैक्स, जो allowances मिलते है उस पर भी टैक्स
सामान लेने जाओ तो इन बचे हुए पैसे जिनका टैक्स भर चुके है अब वहा उस सामान का indirect टैक्स, मूवी, रेस्टोरेंट रेलवे बस के सफर में टैक्स
एक नई गाड़ी लो उसमे टैक्स
सड़क पर चलो उसमे टैक्स
पीने के पानी पर टैक्स
पेट्रोल पर टैक्स पे टैक्स
आखिर इतने तरह के टैक्स लेने के बाद भी सरकारी खजाना नही भरता और क्या टैक्स की न्यूनतम सीमा को बढ़ाकर 10 लाख नही कर देनी चाहिए ।
आखिर जिसको आप नौकरी ना दे सको वो ट्यूशन पढ़ा कर गुजारा करे तो क्या हक़ है आपको उससे टैक्स लेने का , आखिर गली गली घूम कर जो सामान बेच कर कुछ पैसे बैंक में जमा करना चाहे तो क्यो नही बैंक को स्वन्त्रता दे देते हो कि उसकी इनकम को टैक्स में ना जोड़ा जाए ।।
और 10 लाख से ऊपर किसी भी इनकम पर टैक्स 30% एक बराबर क्यो है ??
आखिर पारदर्शिता कब लाएगी सरकार
90% जनता 10 लाख के नीचे आती है तो क्यो नही जनता की पैरवी करने वाली सरकार टैक्स की न्यूनतम सीमा को 10 लाख कर देती है ।।
अपनी राय जरूर बताइये ...
अभी हाल ही में इनकम टैक्स द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि नोटबन्दी के बाद से और बैंकों में पैन कार्ड, आधार कार्ड की अनिवार्यता के बाद से ITR भरने और इनकम टैक्स के स्लैब में आने वालों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही है ...
सरकार इसे अपनी उपलब्धि में जोर शोर से गिना रही है की चोरबाजारी खत्म करके सब को इनकम टैक्स के दायरे में ले आयी है ।।
लेकिन इनकम टैक्स की न्यूनतम सीमा को 2,50,000 ही रखा गया है ।।
जिस हिसाब से महगांई बढ़ रही है उस हिसाब से ये सीमा लगभग सभी मिडिल क्लास यहाँ तक कि लोअर क्लास को भी कवर कर रही है ।।
अब सरकार की नीयत पर आते है
2.50 लाख से 5 लाख तक 5%
5 लाख से 10 लाख तक 20%
और 10 लाख से अनलिमिटेड 30%
इसका मतलब 11 लाख वाला भी 30% और 11 करोड़ वाला भी 30%
आखिर क्यों ??
आज लगभग सभी नौकरीपेशा लोग 5 से 10 लाख वाले स्लैब में आते है, सरकार ने इसे 20% से कम ना करके मिडल क्लास को टैक्स के नाम पर गहरी चोट पहुचाई है
अब केवल टैक्स पर आते है, हमे वेतन टैक्स काट कर दिया जाता है, अब उसमें से भी बचाये गए पैसे FD, RD पर भी टैक्स, जो allowances मिलते है उस पर भी टैक्स
सामान लेने जाओ तो इन बचे हुए पैसे जिनका टैक्स भर चुके है अब वहा उस सामान का indirect टैक्स, मूवी, रेस्टोरेंट रेलवे बस के सफर में टैक्स
एक नई गाड़ी लो उसमे टैक्स
सड़क पर चलो उसमे टैक्स
पीने के पानी पर टैक्स
पेट्रोल पर टैक्स पे टैक्स
आखिर इतने तरह के टैक्स लेने के बाद भी सरकारी खजाना नही भरता और क्या टैक्स की न्यूनतम सीमा को बढ़ाकर 10 लाख नही कर देनी चाहिए ।
आखिर जिसको आप नौकरी ना दे सको वो ट्यूशन पढ़ा कर गुजारा करे तो क्या हक़ है आपको उससे टैक्स लेने का , आखिर गली गली घूम कर जो सामान बेच कर कुछ पैसे बैंक में जमा करना चाहे तो क्यो नही बैंक को स्वन्त्रता दे देते हो कि उसकी इनकम को टैक्स में ना जोड़ा जाए ।।
और 10 लाख से ऊपर किसी भी इनकम पर टैक्स 30% एक बराबर क्यो है ??
आखिर पारदर्शिता कब लाएगी सरकार
90% जनता 10 लाख के नीचे आती है तो क्यो नही जनता की पैरवी करने वाली सरकार टैक्स की न्यूनतम सीमा को 10 लाख कर देती है ।।
अपनी राय जरूर बताइये ...

