एक दादा जी (आम जनता) के दो पोते थे, एक का नाम "प्राइवेट"😎 और दूसरे का नाम "सरकारी"😓 था।
एक दिन दादा जी के मोबाईल की brightness💡✨💡 कम हो गयी।
दादा जी सरकारी के पास गए और बोले बेटा मोबाइल में देखो क्या समस्या है कुछ दिखाई नहीं दे रहा।
सरकारी😓 बोला- दादा जी थोड़ा wait कीजिए मुझे पिता जी (Government)🌇 ने काफ़ी काम दिए हैं, थोड़ा सा फुर्सत मिलते ही आपका काम करता हूँ।
दादा जी में इतना धैर्य कहाँ था कि इन्तजार करते।
दादा जी पहुंचे प्राइवेट😎 के पास, प्राइवेट👔 बड़े फुर्सत में बैठा था।
दादा जी को पानी पिलाया और पूछा दादा जी बताइए क्या सेवा करूँ?🤓
दादा जी उसके व्यवहार से बड़े खुश हुए और अपनी समस्या बता दी।
प्राइवेट बोला दादा जी आप निश्चिंत हो के बैठिये मैं देखता हूँ। उसने मोबाइल की ब्राइटनैस बढ़ा दी और बोला -
"लीजिए दादा जी मोबाइल का बल्ब फ्यूज हो गया था मैंने नया लगा दिया है। बल्ब 500 रूपये का है"
दादा जी ने खुशी खुशी 500 रूपये बल्ब के दे दिए।😇
कुछ देर में दादा जी से उनका दूसरा बेटा, जिसका नाम # निजी_आयोग👺 था मिलने आया।
दादा जी ने बातों बातों में सरकारी के निकम्मेपन और प्राइवेट की कार्य कुशलता की तारीफ़ करते हुए आज की पूरी घटना बता दी। # निजी_आयोग👺 भोले-भाले दादा जी के साथ हुए अन्याय को समझ गया।
# निजी_आयोग ने प्राइवेट से सम्पर्क किया तो उसने 100 रूपये चाचा के हाथ में रख दिए और बोला-
"दादा जी और पिता जी के सामने मेरी तारीफ़ कर देना।"😉
अगले दिन # निजी_आयोग ने दादा जी और पिता जी को "प्राइवेट" के गुणों का बखान कर दिया।
पिताजी एकदम धृतराष्ट्र के माफिक अंधे थे, गुस्से में आकर बोले- इस निकम्मे "सरकारी" को घर से बाहर निकालो,🤬 आज से पूरे घर की देखभाल प्राइवेट😎 करेगा।
सरकारी अवाक है, निःशब्द है।
अपने सामर्थ्य एवं उपयोगिता को दादा जी और पिता जी को समझाना चाहता है😰 परंतु सामने से बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है। डर रहा है कहीं घर से निकालने के साथ ही राष्ट्र-द्रोही ना घोषित कर दिया जाए।😰
दरवाजे के पीछे से प्राइवेट मुस्कुरा रहा हैl😉


