कब खौलेगा रे खून तेरा ...
We Bankers की ओर से महेंद्र सिंह धोनी के रिटायरमेंट पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि ।।
धोनी, एक ऐसा युवा जो ओवर के अंतिम बाल पर भी मैच का पासा पलट सकता था, एक ऐसा प्लेयर जिसके आगे DRS भी फेल हो जाये , एक ऐसा खिलाड़ी जिसके संयम के आगे सामने की टीम खुद ही गलती कर बैठे
एक ऐसा आलराउंडर जिसने क्रिकेट के तीनों संस्करण में अपनी बादशाहत कायम की हो ।।
आज उसने 15 अगस्त के दिन रिटायरमेंट का फैसला किया , आज ऐसा व्यकितत्व जो अगर चाहता तो 3 4 साल तक आराम से टीम में बना रह सकता था ।।
धोनी, ये हमारे भारत की आन शान सम्मान है और इतिहास गवाह है कि जितने भी सुरवीर पराक्रमी राजा महाराजा रहे हैं उन्होंने वक्त से पहले देश की कमान युवाओं के हाथ मे सौंपी है क्योंकि जो जोश युवाओं में होता है उससे देश तरक्की करता है , महेन्द सिंह धोनी का सम्मान भी आज उसी तरह से किया जाना चाहिए ।।
अब आते है अपनी बैंकिंग इंडस्ट्री के नेताओ की जहाँ नेता वो है जिसे बैंक से रिटायर हुए एक जमाना हो गया है ।।
कुर्सी पर ऐसे नेता बैठे है जिन्हें ये तक नही पता कि नए बैंककर्मचारियो का वेतन केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के चपरासी से कम है ।।
ये नेता मिसकंडक्ट पर सिग्नेचर कर के आते है क्योकि इन्हें ये नही पता कि ब्रांच में युवा बैंकरों को ये गिरवी रख कर आये है ।
आखिर जिस उम्र में पूजा पाठ करना चाहिए उस उमर में ये नेता लेवी के लालच में क्यो वेतन समझौता डिले करवाते है ।।
क्यो ऑनलाइन पोल के माध्यम से ये जानने की कोशिस नही करते कि बैंक में विद्यमान 80% युवा क्या चाहते है ??
क्यो ये IBA जो कि गैर संवैधानिक संस्था है उसके साथ 35 मीटिंग करते है
28 दिन की स्ट्राइक का पैसा कटवाते है
और मात्र 2.5% की वृद्धि करवा पाते हैं ।
ये रिटायर्ड नेता क्यो नही मान लेते है कि अब बुढ़ापे में जिसको बैसाखी की जरूरत हो वो बैंककर्मचारियो का भविष्य कैसे लिख पायेगा ।।
इतना तो तय है कि धोनी भारतीय है और उसमे भारतीय संस्कार थे इसलिए उसने मर्यादा को बनाते हुए युवाओं के लिए खुद ही जगह खाली कर दी ।।
पर बैंक के इन नेताओं में कौन सा DNA है जिन्हें कुछ फर्क ही नही पड़ता ।।
और बैंक के युवा बैंककर्मचारियो ने ऐसी कौन सी दवा पी ली है कि उसे न चाहते हुए भी बाहर निकाल नही पा रहे हैं ।।
We Bankers की ओर से महेंद्र सिंह धोनी के रिटायरमेंट पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि ।।
धोनी, एक ऐसा युवा जो ओवर के अंतिम बाल पर भी मैच का पासा पलट सकता था, एक ऐसा प्लेयर जिसके आगे DRS भी फेल हो जाये , एक ऐसा खिलाड़ी जिसके संयम के आगे सामने की टीम खुद ही गलती कर बैठे
एक ऐसा आलराउंडर जिसने क्रिकेट के तीनों संस्करण में अपनी बादशाहत कायम की हो ।।
आज उसने 15 अगस्त के दिन रिटायरमेंट का फैसला किया , आज ऐसा व्यकितत्व जो अगर चाहता तो 3 4 साल तक आराम से टीम में बना रह सकता था ।।
धोनी, ये हमारे भारत की आन शान सम्मान है और इतिहास गवाह है कि जितने भी सुरवीर पराक्रमी राजा महाराजा रहे हैं उन्होंने वक्त से पहले देश की कमान युवाओं के हाथ मे सौंपी है क्योंकि जो जोश युवाओं में होता है उससे देश तरक्की करता है , महेन्द सिंह धोनी का सम्मान भी आज उसी तरह से किया जाना चाहिए ।।
अब आते है अपनी बैंकिंग इंडस्ट्री के नेताओ की जहाँ नेता वो है जिसे बैंक से रिटायर हुए एक जमाना हो गया है ।।
कुर्सी पर ऐसे नेता बैठे है जिन्हें ये तक नही पता कि नए बैंककर्मचारियो का वेतन केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के चपरासी से कम है ।।
ये नेता मिसकंडक्ट पर सिग्नेचर कर के आते है क्योकि इन्हें ये नही पता कि ब्रांच में युवा बैंकरों को ये गिरवी रख कर आये है ।
आखिर जिस उम्र में पूजा पाठ करना चाहिए उस उमर में ये नेता लेवी के लालच में क्यो वेतन समझौता डिले करवाते है ।।
क्यो ऑनलाइन पोल के माध्यम से ये जानने की कोशिस नही करते कि बैंक में विद्यमान 80% युवा क्या चाहते है ??
क्यो ये IBA जो कि गैर संवैधानिक संस्था है उसके साथ 35 मीटिंग करते है
28 दिन की स्ट्राइक का पैसा कटवाते है
और मात्र 2.5% की वृद्धि करवा पाते हैं ।
ये रिटायर्ड नेता क्यो नही मान लेते है कि अब बुढ़ापे में जिसको बैसाखी की जरूरत हो वो बैंककर्मचारियो का भविष्य कैसे लिख पायेगा ।।
इतना तो तय है कि धोनी भारतीय है और उसमे भारतीय संस्कार थे इसलिए उसने मर्यादा को बनाते हुए युवाओं के लिए खुद ही जगह खाली कर दी ।।
पर बैंक के इन नेताओं में कौन सा DNA है जिन्हें कुछ फर्क ही नही पड़ता ।।
और बैंक के युवा बैंककर्मचारियो ने ऐसी कौन सी दवा पी ली है कि उसे न चाहते हुए भी बाहर निकाल नही पा रहे हैं ।।

