हिंदी दैनिक अखबार दैनिक जागरण के editorial column में अपने को पत्रकार और इकॉनॉमिस्ट कहने वाले भरत झुनझुनवाला ने बैंकर्स को नोटबन्दी में जनता को कष्ट देने, काला धन सफेद करने का आरोप लगाया।
जब बैंकर्स ने उन्हें call करके सबूत मांगा तो उन्हीने कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया और अपने आंखों देखा होने का तर्क दिया। अगर ऐसा था तो वो पहले क्यों नहीं रिपोर्ट किया!?
बैंकर्स ने नोटबन्दी में जी जान लगा कर काम किया, बहुतों ने पॉकेट से पैसा भी भरा। नोटबन्दी के सफल या फैल होने की टिपण्णी ना तो अब तक सरकार ने की है, ना ही RBI ने।
इसलिए अखबार द्वारा लगाया आरोप बेबुनियाद है, ऊपर से इसका ठीकरा बैंकर्स पे डाल कर उन्हीने बैंकर्स की छवि को जनता के सामने धूमिल करने का काम किया है।
जब बैंकर्स ने उन्हें call करके सबूत मांगा तो उन्हीने कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया और अपने आंखों देखा होने का तर्क दिया। अगर ऐसा था तो वो पहले क्यों नहीं रिपोर्ट किया!?
बैंकर्स ने नोटबन्दी में जी जान लगा कर काम किया, बहुतों ने पॉकेट से पैसा भी भरा। नोटबन्दी के सफल या फैल होने की टिपण्णी ना तो अब तक सरकार ने की है, ना ही RBI ने।
इसलिए अखबार द्वारा लगाया आरोप बेबुनियाद है, ऊपर से इसका ठीकरा बैंकर्स पे डाल कर उन्हीने बैंकर्स की छवि को जनता के सामने धूमिल करने का काम किया है।


