बैंकों के राष्ट्रीयकरण के रावण कौन ? #SAVEPUBLICSECTORBANKS #19JULY
हालिया चुनावों में करीब पांच हजार करोड़ के इलेक्टोरल बांड(राजनितिक चन्दा ) की बिक्री हुई .. जिसमे कि न्यूनतम 1 -1 करोड़ की राशि वाले अधिकतम बांड बिके मगर हम कभी नहीं जान पाएंगे की उसे खरीदने वाले कौन थे ...निश्चित ही मंहगाई की डायन मार झेलने वाले भारतीय गरीब या मध्यम वर्ग नहीं रहें होंगे ....बल्कि मुटठी भर वो कॉर्पोरेट लोग जो गरीबों के खून चूसने और अधिकतम लाभ मार्जिन प्राप्त करने के लिए कालांतर से भारत की लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में टांग अड़ाने के आदी रहें हैं /यह ध्यातव्य है की इस एलेक्टरोल बांड का 90 फीसदी भुगतान उसी वर्तमान सरकार के पक्ष में हुआ जिसने कभी इस विधान को पारित करने में केन्द्रीय भूमिका निभाई थी / इस कानून के मुताबिक क्रेता और बिक्रेता दोनों की पहचान गुप्त रखी जायेगी / आखिर ऐसी अपारदर्शिता भरी चुप्पी क्यूँ ....वैसे पौराणिक काल में ऐसे कई गाथाओं की जानकारी मिलती है जहाँ किसी पवित्र कसम की विवशता या दैवीय शाप की संभावना में कुछ चीजों को गोपनीयता बरक़रार रखने के लिए लोग संकल्पकृत रहतें थे / निश्चित ही पूंजीवाद के परजीवियों और लोकतंत्र के ठीकेदारों की ये नयी अंडरस्टैंडिंग है जिसे पहली बार कानूनी रूप से वैध बना दिया गया / मैंने कुछ समय पहले एक वीडियो बार-बार और कई बार रिप्ले और पॉज करके देखि थी ...वह वीडियो थी आदरणीय हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की ...जिसमे उन्होंने PSU अर्थात सरकारी उपक्रमों के बारे में कहा था की इनका जन्म केवल मरने के लिए हुआ है ...साथ ही यह भी कहा की भारत में बैंकों का 1969 का राष्ट्रीयकरण महज एक छलावा है और कुछ नहीं / उनके इस प्रवचन के बाद देखा गया की एक- एक करके PSU इकाईयों की तबियत बिगड़ने लगी ....स्वतः बिगड़ने लगी या बिगाड़ी जाने लगी ..यह ..पुरे राष्ट्र में बहस का विषय बन गया / लोग पूछने लगे की भारत में डिजिटलिकरण के बढ़ावे के लिए स्पेक्ट्रम वितरण में जिस तरह का मोहबबत सरकार का एक निजी कंपनी जिओ के लिए दिखा उसका इंच भर भी बीएसएनएल के लिए कभी क्यूँ नहीं दिखा / एयर इंडिया की कहानी भी किसी से छुपी नहीं है / आज दोनों ही उपक्रम सरकार के निजीकरण प्रेम का शिकार हो गये / पिछले कई माह से इनके कर्मचारी वेतन के अभाव में भूख से मौन मृत्यु का इन्तजार कर रहे हैं..मगर सरकार के पास इसके निराकरण का कोई रोड माप नहीं /
अगर कोई रोड माप है तो बस इतना की इसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों को नौने-पौने दाम में बेच दिया जाय .. भले ही इस प्रक्रिया में लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़े / IDBI के निजीकरण के बाद बैंकों में मर्जर से समस्त बैंकिंग प्रणाली को पूंजीपति वर्ग को बेचने का प्रयास तेज कर दिया गया है / यह सरकार के उसी संकल्पना का हिस्सा है जिसे हालिया बजट में बैंकों से सरकारी पूंजी 51 फीसदी से कम करने को सरकार का प्रमुख लक्ष्य बताया गया है /
क्या निजीकरण का श्रीगणेश ...उपरोक्त पांच हजार करोड़ के बांड खरीदने वाले कॉर्पोरेटस को प्रत्युतर में ईनाम की पहली किश्त भर है या और कुछ भी / बैंकों के राष्ट्रीयकरण ने भारत में ने केवल हरित क्रांति का आगाज किया बल्कि पूंजीपतियों से इतर गरीब और सर्व साधारण लोगों का असाधारण कल्याण भी किया/ सरकारी बैंकों ने लाभ -हानि के गणित से अलग सामाजिक सरोकार के उत्पाद यथा जीरो बैलेंस अकाउंट,कृषि ऋण, मुद्रा ऋण आदि में एतिहासिक कार्य किया और जिसकी निजी बैंकों से लेश मात्र भी तुलना बईमानी है / नोटबंदी हो या जनधन राष्ट्र सेवा के नाम पर सरकारी बैंक कर्मियों ने अपने स्वास्थ्य और अर्थ हितों से इतर हमेशा बढ़ -चढ़ कर भाग लिया जिसे महज लाभ- हानि के अंक गणित पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता / वर्तमान बैंकों के NPA जो की विशेष रूप से कॉर्पोरेट स्तर के हैं ...का दूर - दूर तक सरोकार आम बैंक कर्मियों या आम ग्राहकों से नहीं है / सच बस यही है की सुप्रीम कोर्ट के अनेकानेक निर्देश के बावजूद सरकार बड़े डिफाल्टर्स का नाम तक हलक से बाहर नहीं करती / चतुर्दिक दिशाओं से निजीकरण का आगाज हो चूका है / बिक्री के लिए स्टेशन, एअरपोर्ट सबके मोल -भाव शुरू हो चुके हैं / शिक्षा और चिकित्सा के निजीकरण से आम आदमी पहले ही त्रस्त है / आज का निजीकरण वस्तुतः ऐसा व्यावसायिक तंत्र है जो प्यास , भूख, बिमारी सबको मुनाफे के एक तगड़े अवसर के रूप में देखता है और जिसके दंश में हमेशा कोई गरीब मारा जाता है / बैंकों का राष्ट्रीयकरण हो चाहे ,शिक्षा,चिकित्सा या अन्य का ये हमारी मिश्रित अर्थव्यवस्था की वैधानिक विरासत है / सत्ता और पूंजीवाद के इस भयानक साजिश से इतर आओ हम सब मिलकर इस राष्ट्रियकरण की मशाल को और तेज प्रज्जवलित करें और अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित थामे रखें / जय हिन्द ...जय भारत
हालिया चुनावों में करीब पांच हजार करोड़ के इलेक्टोरल बांड(राजनितिक चन्दा ) की बिक्री हुई .. जिसमे कि न्यूनतम 1 -1 करोड़ की राशि वाले अधिकतम बांड बिके मगर हम कभी नहीं जान पाएंगे की उसे खरीदने वाले कौन थे ...निश्चित ही मंहगाई की डायन मार झेलने वाले भारतीय गरीब या मध्यम वर्ग नहीं रहें होंगे ....बल्कि मुटठी भर वो कॉर्पोरेट लोग जो गरीबों के खून चूसने और अधिकतम लाभ मार्जिन प्राप्त करने के लिए कालांतर से भारत की लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में टांग अड़ाने के आदी रहें हैं /यह ध्यातव्य है की इस एलेक्टरोल बांड का 90 फीसदी भुगतान उसी वर्तमान सरकार के पक्ष में हुआ जिसने कभी इस विधान को पारित करने में केन्द्रीय भूमिका निभाई थी / इस कानून के मुताबिक क्रेता और बिक्रेता दोनों की पहचान गुप्त रखी जायेगी / आखिर ऐसी अपारदर्शिता भरी चुप्पी क्यूँ ....वैसे पौराणिक काल में ऐसे कई गाथाओं की जानकारी मिलती है जहाँ किसी पवित्र कसम की विवशता या दैवीय शाप की संभावना में कुछ चीजों को गोपनीयता बरक़रार रखने के लिए लोग संकल्पकृत रहतें थे / निश्चित ही पूंजीवाद के परजीवियों और लोकतंत्र के ठीकेदारों की ये नयी अंडरस्टैंडिंग है जिसे पहली बार कानूनी रूप से वैध बना दिया गया / मैंने कुछ समय पहले एक वीडियो बार-बार और कई बार रिप्ले और पॉज करके देखि थी ...वह वीडियो थी आदरणीय हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की ...जिसमे उन्होंने PSU अर्थात सरकारी उपक्रमों के बारे में कहा था की इनका जन्म केवल मरने के लिए हुआ है ...साथ ही यह भी कहा की भारत में बैंकों का 1969 का राष्ट्रीयकरण महज एक छलावा है और कुछ नहीं / उनके इस प्रवचन के बाद देखा गया की एक- एक करके PSU इकाईयों की तबियत बिगड़ने लगी ....स्वतः बिगड़ने लगी या बिगाड़ी जाने लगी ..यह ..पुरे राष्ट्र में बहस का विषय बन गया / लोग पूछने लगे की भारत में डिजिटलिकरण के बढ़ावे के लिए स्पेक्ट्रम वितरण में जिस तरह का मोहबबत सरकार का एक निजी कंपनी जिओ के लिए दिखा उसका इंच भर भी बीएसएनएल के लिए कभी क्यूँ नहीं दिखा / एयर इंडिया की कहानी भी किसी से छुपी नहीं है / आज दोनों ही उपक्रम सरकार के निजीकरण प्रेम का शिकार हो गये / पिछले कई माह से इनके कर्मचारी वेतन के अभाव में भूख से मौन मृत्यु का इन्तजार कर रहे हैं..मगर सरकार के पास इसके निराकरण का कोई रोड माप नहीं /
अगर कोई रोड माप है तो बस इतना की इसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों को नौने-पौने दाम में बेच दिया जाय .. भले ही इस प्रक्रिया में लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़े / IDBI के निजीकरण के बाद बैंकों में मर्जर से समस्त बैंकिंग प्रणाली को पूंजीपति वर्ग को बेचने का प्रयास तेज कर दिया गया है / यह सरकार के उसी संकल्पना का हिस्सा है जिसे हालिया बजट में बैंकों से सरकारी पूंजी 51 फीसदी से कम करने को सरकार का प्रमुख लक्ष्य बताया गया है /
क्या निजीकरण का श्रीगणेश ...उपरोक्त पांच हजार करोड़ के बांड खरीदने वाले कॉर्पोरेटस को प्रत्युतर में ईनाम की पहली किश्त भर है या और कुछ भी / बैंकों के राष्ट्रीयकरण ने भारत में ने केवल हरित क्रांति का आगाज किया बल्कि पूंजीपतियों से इतर गरीब और सर्व साधारण लोगों का असाधारण कल्याण भी किया/ सरकारी बैंकों ने लाभ -हानि के गणित से अलग सामाजिक सरोकार के उत्पाद यथा जीरो बैलेंस अकाउंट,कृषि ऋण, मुद्रा ऋण आदि में एतिहासिक कार्य किया और जिसकी निजी बैंकों से लेश मात्र भी तुलना बईमानी है / नोटबंदी हो या जनधन राष्ट्र सेवा के नाम पर सरकारी बैंक कर्मियों ने अपने स्वास्थ्य और अर्थ हितों से इतर हमेशा बढ़ -चढ़ कर भाग लिया जिसे महज लाभ- हानि के अंक गणित पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता / वर्तमान बैंकों के NPA जो की विशेष रूप से कॉर्पोरेट स्तर के हैं ...का दूर - दूर तक सरोकार आम बैंक कर्मियों या आम ग्राहकों से नहीं है / सच बस यही है की सुप्रीम कोर्ट के अनेकानेक निर्देश के बावजूद सरकार बड़े डिफाल्टर्स का नाम तक हलक से बाहर नहीं करती / चतुर्दिक दिशाओं से निजीकरण का आगाज हो चूका है / बिक्री के लिए स्टेशन, एअरपोर्ट सबके मोल -भाव शुरू हो चुके हैं / शिक्षा और चिकित्सा के निजीकरण से आम आदमी पहले ही त्रस्त है / आज का निजीकरण वस्तुतः ऐसा व्यावसायिक तंत्र है जो प्यास , भूख, बिमारी सबको मुनाफे के एक तगड़े अवसर के रूप में देखता है और जिसके दंश में हमेशा कोई गरीब मारा जाता है / बैंकों का राष्ट्रीयकरण हो चाहे ,शिक्षा,चिकित्सा या अन्य का ये हमारी मिश्रित अर्थव्यवस्था की वैधानिक विरासत है / सत्ता और पूंजीवाद के इस भयानक साजिश से इतर आओ हम सब मिलकर इस राष्ट्रियकरण की मशाल को और तेज प्रज्जवलित करें और अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित थामे रखें / जय हिन्द ...जय भारत

