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Monday, March 15, 2021

आज सरकारी बैंक के निजीकरण के विरोध में पुरे देश में एक साथ सफल आन्दोलन का आयोजन किया गया , आम जनता भी बैंककर्मचारियों के सपोर्ट में आई

 

यदि बात करें जोश, दिलेरी, बहादुरी और निजीकरण के खिलाफ एकजुट होकर आर पार के निर्णायक संघर्ष के लिए उत्कट चाह की तो आज की बैंक कर्मियों की हड़ताल अभूतपूर्व रूप से सफल रही, बैंक कर्मियों ने बड़ी संख्या में भागीदारी कर नेताओं को संदेश दिया कि यह संघर्ष महज दो दिन की हड़ताल पर थमना नहीं चाहिए । लेकिन यदि बात करें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अस्तित्व से जुड़े सबसे बड़े मुद्दे पर बैंक कर्मियों के नेतृत्व की तो जो समाचार मिल रहे हैं उसके अनुसार कर्मचारी एकता के गगनचुंबी नारे लगा दुनिया के मजदूरों की एकता की बात करने वाले बैंक कर्मियों के नेताओं की तो वे एकता के लिए समर्पित नहीं दिखे-अनेक स्थानों पर उन्होंने बैनर तो यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस का लगा उसमें सभी घटक संगठनों के नाम लिखे लेकिन धरना प्रदर्शन अलग अलग किए । 

 




यूनाइटेड फोरम ऑफ वी बैंकर्स द्वारा विचारधारा और सिद्धांतों में मतभेद के बावजूद एकता की आवश्यकता के मद्देनजर  UFBU की दो दिन की हड़ताल में शामिल होने और उसे पूरा समर्थन देने की घोषणा के बावजूद UFBU की ओर से उससे धरना प्रदर्शन में शामिल होने की पेश कश नहीं की गई । बावजूद इसके वी बैंकर्स ने अपने सदस्यों और समर्थकों से अनुरोध किया कि वे जहां हैं जिस स्थिति में हैं, हड़ताल के कार्यक्रमों में शामिल हों। ऐसी परिस्थितियों में कानपुर में वी बैंकर्स ने अपना धरना प्रदर्शन अलग करने का निर्णय लिया और कल के सद्बुद्धि यज्ञ के बाद आज बैंक ऑफ इंडिया की मॉल रोड शाखा पर धरना दिया । 2018 में पंजीकृत यूनियन बनने के बाद से यह पहला अवसर था जब किसी शहर में एक यूनियन के रूप में वी बैंकर्स जमीन पर संघर्ष करने की राह पर बढ़ा । उसके युवा रणबांकुरों ने अथक परिश्रम किया जिसका यह परिणाम था कि जितनी उसकी कानपुर में सदस्य संख्या है उससे अधिक संख्या में बैंक कर्मियों ने भाग लिया। उनका उत्साह देखते ही बनता था, महिला सदस्यों ने न केवल भाग लिया बल्कि आगे बढ़ कर अपने विचार भी व्यक्त किए । आज के धरना प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए एक एक साथी बधाई का पात्र है । 


उधर लखनऊ में वी बैंकर्स की नेता शिखा चौहान ने अपने साथियों के साथ धरने में भाग ले कर एक सिंहनी के समान गर्जना की ।

उत्तर प्रदेश के आगरा, मथुरा, उन्नाव, शाहजहांपुर, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के बाहर दिल्ली, पटना, गुजरात, बंगाल आदि से वी बैंकर्स के रण बांकुरों द्वारा हड़ताल में शामिल होकर धरना प्रदर्शन मैं भाग लेने के समाचार मिले हैं । कल के कार्यक्रमों को आज से भी अधिक सफल बनाना है ।

किसी भी आंदोलन की सफलता उसके नेतृत्व के जुझारूपन पर निर्भर करती है, बैंक कर्मियों ने अपने हिस्से का काम बखूबी किया है अब बारी है नेतृत्व की । कल की हड़ताल के बाद स्थापित यूनियनों के नेता जब दो दिन की हड़ताल की समीक्षा के साथ संघर्ष के अगले दौर का निर्णय लेने बैठेंगे तब उनकी परीक्षा की बारी होगी । यदि वे अब भी अनिश्चितकालीन हड़ताल की कॉल न देकर दो तीन दिन की हड़ताल की कॉल देते हैं तो यह निश्चित हो जाएगा कि मैच फिक्स है और नेता महज विरोध की रस्म अदायगी कर रहे हैं ।