#passbookprinting विवाद को लेकर सूरत पुलिस ने बैंक की महिला अफसर पर हाथ छोड़ा और देख लेने की बात बोली - We Bankers

Breaking

We Bankers

Banking Revolution in india

Wednesday, June 24, 2020

#passbookprinting विवाद को लेकर सूरत पुलिस ने बैंक की महिला अफसर पर हाथ छोड़ा और देख लेने की बात बोली

यूँ तो पुलिस डिपार्टमेंट के लिए बड़ी इज़्ज़त रहती है दिल में पर कुछ ऐसे वाक्ये हो जाते हैं जिनसे मन एकदम तार तार हो जाता है.

ऐसा ही एक घटनाक्रम हुआ आज सूरत के सरोली स्थित केनरा बैंक की शाखा में. पासबुक प्रिंटिंग को ले कर हुई एक छोटी सी बात पर सूरत पुलिस के दो कर्मचारी घनश्याम और सुभाष ने शाखा परिसर के अंदर घुस कर महिला कर्मचारी के साथ ना सिर्फ अभद्र व्यवहार किया बल्कि शारीरिक असॉल्ट भी किया. 

ज़रा सोचिए, आप अपने घर की बहू बेटी को ये कहते हैं कि बैंक की नौकरी कर लो क्योंकि समाज में इज़्ज़त है, समय से घर आ जाया करोगी, घर के पास ही रहोगी. लेकिन फिर कुछ ऐसा होता है जैसा आज हुआ और बैंक की नौकरी के लिए आपकी धारणा तार तार हो जाती है.

नीचे जो आप वीडियो देख रहे हैं वो किसी गली के गुंडे मवाली के द्वारा की हुई हरकत नहीं है, बल्कि जिनके कंधों पर इन्ही बहु बेटियों की सुरक्षा का जिम्मा है उन पुलिस वालों के द्वारा किया गया एक बेहद घिनौना कृत्य है.

शर्म से सर झुक जाता है वर्दी के रौब में अंधे हो चुके इन पुलिस वालों की ऐसी करतूत देख कर. और यह सब हो भी रहा है तो ऐसे राज्य में जहां पढ़े लिखे लोग हैं, सभ्यता के लिए जाने जाते हैं. गुजरात स्वयं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की जन्मभूमि और कर्मभूमि रहा है, परंतु आज बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि उनके गृह राज्य में कानून व्यवस्था के रक्षक ही भक्षक बनने को आतुर हैं.

जिस देश में महिलाओं को सर्वोपरि सम्मान दिया जाता हो, उस देश में ऐसी घटना होना अपने आप में  समाज के  मुँह पर एक जोरदार तमाचा है. यह तमाचा है भारत सरकार की उस मुहिम को जिसे वो 'बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ' के नाम से चलाती है.

ज़रा सोचिये जिस महिला के साथ ये हुआ है उनके ऊपर क्या बीत रही होगी. उनके पिता ने बेटी बचाई, बेटी पढ़ाई, और बेटी ने भी बैंक की नौकरी कर के अपने पूज्य पिता जी की मेहनत को सफल बना दिया. उसी बेटी ने आज कानून के इस घिनौने चेहरे को सबके सामने ला दिया है.

उम्मीद है कि सूरत पुलिस इस मुद्दे पर सख्त कार्यवाही करेगी, क्योंकि किसी देश के नागरिकों का अगर कानून व्यवस्था पर से भरोसा उठ जाए तो इससे ज़्यादा शर्मनाक बात कोई और हो ही नहीं सकती.


#ShameSuratPolice

सूरत पुलिस का बदसूरत चेहरा। पुलिस के भेष में गुंडा। गुजरात मॉडल की सच्चाई, महिला बैंक कर्मचारी से की हाथापाई, शर्म भी नही आई। ग्राहक सेवा के नाम पर बैंकर्स कितना कुछ झेलेंगे ? 3 महीने से बिना मैनेजर के केवल दो लोग  ( 1 पुरुष असिस्टेन्ट मैनेजर और महिला क्लर्क ) कैनरा बैंक (e सिंडिकेट बैंक) सरौली शाखा सूरत  को मैनेज कर रहे थे। ऐसे में कल एक ग्राहक घनश्याम भाई आया पासबुक अपडेट के लिए, पासबुक मशीन खराब होने की वजह से एससिस्टेन्ट मैनेजर ने ग्राहक को बैंक खाते का स्टेटेमेन्ट निकाल कर दिया , लेकिन 4 बजे के बाद वह ग्राहक अपने किसी रिश्तेदार सुभाष भाई पराग को साथ लाया और पासबुक अपडेट के लिए जोर देने लगा। एससिस्टेन्ट मैनेजर ने उन्हें विनम्रता से समझाया कि पासबुक मशीन खराब है, इस पर उस ग्राहक के रिश्तेदार ने बैंक कर्मियों के साथ गाली गलौज अभद्रता और बहसबाजी शुरू कर दी। जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग महिला कर्मचारी ने शुरू कर दी, ये देखकर सुभाष भाई जो कि गुजरात पुलिस विभाग से ताल्लुक रखता है ने अपना आपा खो दिया और उस बदतमीज ने कैश काउंटर का दरवाजा खोलकर महिला कर्मचारी को जोर से धक्का दिया। परिणाम स्वरूप वह जमीन पर गिर गई और उन्हें काफी चोट लगी। असिस्टटेंट मैनेजर के साथ भी उस बदमाश ने हाथापाई की। ये पूरा वाक्या बेहद शर्मनाक है, पहले एक सरकारी विभाग पुलिस कर्मचारी बिना मास्क पहने बैंक के अंदर आया, एक पब्लिक सर्वेंट होकर इसने दूसरे ऑन ड्यूटी पब्लिक सर्वेंट बैंक महिला कर्मचारी पर हाथ उठाया, अभद्र टिपण्णी गाली गलौज किया। पूरा बैंकिंग वर्ग इसकी तीव्र भर्त्सना करता है। और ताजा अपडेट के अनुसार दोषी को गिरफ़्तार किया जा चुका है। पर इतना काफी नही है। उस बदतमीज को नौकरी से बर्खास्त की जानी चाहिए। इस तरह की घटना बैंक प्रबंधन की अपने शाखा में तैनात स्टाफ़स के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। एससिस्टेन्ट मैनेजर के बार बार अनुरोध के बावजूद कोई ब्रांच मैनेजर नही दिया गया पिछले तीन महीने से, न बैंक शाखा में कोई सेक्युरिटी गार्ड  दिया गया। बैंक प्रबंधन को अपने बिज़नेस टारगेट्स तो पूरे चाहिए लेकिन शाखा में तैनात स्टाफ की समस्याओं के प्रति कोई गंभीरता नही। जब तक ऐसी दो चार अप्रिय घटना नही घटती , बैंक प्रबंधन आंख मूंद कर बैठी रहती है। आजकल ग्राहकों दारा बैंक कर्मियों के साथ हाथापाई मारपीट की घटना बढ़ती ही जा रही है, इसका मुख्य कारण बैंक शाखाओ में बढ़ते ग्राहकों की संख्या और घटती स्टाफ की संख्या है। कम स्टाफ में बैंकर्स सभी ग्राहकों को पर्याप्त गुणवत्ता वाली सेवा नही दे पा रहे जिस वजह से अक्सर ग्राहक जो दूसरे सरकारी दफ्तरों में भीगी बिल्ली बन जाता हैं बैंक शाखा में आकर खुद को शेर समझता है और आजकल झगड़े के बाद अब बैंक कर्मियों के साथ हाथपाई पर भी उतर आया है। पर बैंक प्रबंधन कॉस्ट कटिंग के नाम पर न स्टाफ भर्ती करता है, न सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड नियुक्त करता है। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों में ऐसी घटना बढ़ती ही जाएंगी अगर पर्याप्त भर्तियां न की गई तो।
close