कानपुर, 23 अप्रैल । पंजाब नैशनल बैंक में अधीनस्थ सँवर्ग से क्लर्क के रूप में पदोन्नति के लिए अपनाई गई प्रक्रिया में मनमानी, धांधली, पक्षपात और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों की अनदेखी की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए क्षेत्रीय श्रमायुक्त (केंद्रीय), लखनऊ श्री ओम् प्रकाश सिंह ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33 में निहित शक्तियों का उपयोग करते हुए पंजाब नैशनल बैंक के मुख्य कार्यकारी एवं प्रबन्ध निदेशक व महाप्रबंधक (कार्मिक) को शिकायत की जाँच पूरी होने तक यथा स्थिति बनाए रखने के निर्देश इलेक्ट्रॉनिक माध्यम ईमेल के ज़रिए जारी किए हैं ।
उल्लेखनीय है कि पदोन्नति हेतु पंजाब नैशनल बैंक ने 23 फ़रवरी को देश भर में ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की थी जिसमें 3396 अधीनस्थ सँवर्ग के कर्मचारियों ने भाग लिया था, 31 मार्च को जब परिणाम घोषित हुए तब पता चला कि इन 3396 कर्मचारियों में से एक भी पास नहीं हुआ है और क्लर्क पद की 752 रिक्तियों को 1864 स्नातक चपरासियों का साक्षात्कार लेकर उनमें से 752 को सफल घोषित कर दिया गया है । वरिष्ठ कर्मचारी नेता कमलेश चतुर्वेदी ने कोरोना वाइरस के फैलाव को रोकने के लिए सरकार द्वारा लागू प्रतिबंधों के चलते क्षेत्रीय श्रमायुक्त (केंद्रीय) लखनऊ को दूरभाष से वस्तु स्थिति से अवगत करवाते हुए विस्तृत शिकायत दस्तावेज़ों सहित दी गई, जिसे संज्ञान में लेते हुए यथास्थित बनाए रखने के निर्देश जारी किए गए हैं ।
श्री चतुर्वेदी ने बताया कि बैंक में चपरासी पद पर नियुक्ति हेतु शैक्षिक योग्यता 10+2 या समकक्ष परीक्षा में उत्तीर्ण होना है और ऐसी कोई बाध्यता नहीं है कि पदोन्नति हेतु स्नातक की योग्यता अर्जित की जाय-ऐसे में पहले 10+2 और उससे नीचे की शैक्षणिक योग्यता वाले अभ्यर्थियों को पदोन्नति हेतु पात्र मानते हुए उनसे आवेदन लेते हुए उनकी ऑनलाइन परीक्षा लेना और फिर पदोन्नति हेतु ऑनलाइन परीक्षा में उनके प्रदर्शन को पूरी तरह नकारते हुए केवल स्नातक योग्यता वाले कर्मचारियों को ही साक्षात्कार के माध्यम से पदोन्नति देना भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन है । उन्होंने आरोप लगाया कि निचले पदों पर नियुक्ति और पदोन्नति में साक्षात्कार के माध्यम को बन्द करने के केंद्रीय सरकार के निर्देशों को भी ताक पर इसलिए रख दिया गया ताकि चहेतों को पदोन्नति बिना योग्यता प्रमाणित किए रेवड़ी की तरह बाँटी जा सके और यह बात घोषित परिणामों से पूरी तरह स्पष्ट है-2014 में नियुक्त क्लर्क पद पर अस्थाई रूप से कार्य करते हुए अपनी योग्यता प्रमाणित कर देने वाले कर्मचारी तो फेल कर दिए गए, 2017 में नियुक्ति पाने वाले प्रशासनिक कार्यालयों में नियुक्त कर्मचारी उच्चअधिकारियों से निकटता के आधार पर सफल घोषित कर दिए गए । केंद्रीय सतर्कता आयोग में ऑनलाइन परीक्षा के आयोजन पर भारी भरकम राशि व्यय किए जाने और फिर उस परीक्षा को अनावश्यक मानते हुए धांधली और पक्षपात करते हुए बड़ी संख्या में चहेतों को पदोन्नति दिए जाने की शिकायत दर्ज करवाते हुए जाँच की माँग की गई है -वी बैंकर्स के सर्वश्री आशीष मिश्रा, राहुल मिश्रा, सैम वर्मा, शिखा चौहान, सुनील श्रीवास्तव, हनी मूलजानी, देवल मिश्रा, आशुतोष श्रीवास्तव, ओंकार सचान आदि ने एक बयान में कहा है कि कोरोना सम्बन्धी प्रतिबन्ध समाप्त होते ही पूरी प्रक्रिया को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी और व्यवस्था को पारदर्शी बनाए जाने के लिए संघर्ष किया जाएगा ।
श्री चतुर्वेदी ने बताया कि बैंक में चपरासी पद पर नियुक्ति हेतु शैक्षिक योग्यता 10+2 या समकक्ष परीक्षा में उत्तीर्ण होना है और ऐसी कोई बाध्यता नहीं है कि पदोन्नति हेतु स्नातक की योग्यता अर्जित की जाय-ऐसे में पहले 10+2 और उससे नीचे की शैक्षणिक योग्यता वाले अभ्यर्थियों को पदोन्नति हेतु पात्र मानते हुए उनसे आवेदन लेते हुए उनकी ऑनलाइन परीक्षा लेना और फिर पदोन्नति हेतु ऑनलाइन परीक्षा में उनके प्रदर्शन को पूरी तरह नकारते हुए केवल स्नातक योग्यता वाले कर्मचारियों को ही साक्षात्कार के माध्यम से पदोन्नति देना भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन है । उन्होंने आरोप लगाया कि निचले पदों पर नियुक्ति और पदोन्नति में साक्षात्कार के माध्यम को बन्द करने के केंद्रीय सरकार के निर्देशों को भी ताक पर इसलिए रख दिया गया ताकि चहेतों को पदोन्नति बिना योग्यता प्रमाणित किए रेवड़ी की तरह बाँटी जा सके और यह बात घोषित परिणामों से पूरी तरह स्पष्ट है-2014 में नियुक्त क्लर्क पद पर अस्थाई रूप से कार्य करते हुए अपनी योग्यता प्रमाणित कर देने वाले कर्मचारी तो फेल कर दिए गए, 2017 में नियुक्ति पाने वाले प्रशासनिक कार्यालयों में नियुक्त कर्मचारी उच्चअधिकारियों से निकटता के आधार पर सफल घोषित कर दिए गए । केंद्रीय सतर्कता आयोग में ऑनलाइन परीक्षा के आयोजन पर भारी भरकम राशि व्यय किए जाने और फिर उस परीक्षा को अनावश्यक मानते हुए धांधली और पक्षपात करते हुए बड़ी संख्या में चहेतों को पदोन्नति दिए जाने की शिकायत दर्ज करवाते हुए जाँच की माँग की गई है -वी बैंकर्स के सर्वश्री आशीष मिश्रा, राहुल मिश्रा, सैम वर्मा, शिखा चौहान, सुनील श्रीवास्तव, हनी मूलजानी, देवल मिश्रा, आशुतोष श्रीवास्तव, ओंकार सचान आदि ने एक बयान में कहा है कि कोरोना सम्बन्धी प्रतिबन्ध समाप्त होते ही पूरी प्रक्रिया को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी और व्यवस्था को पारदर्शी बनाए जाने के लिए संघर्ष किया जाएगा ।


