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Monday, December 10, 2018

UFBU के नेताओ और सभी युवा बैंकर्स से मेरा ये साधारण सा सवाल है ...

UFBU के नेताओ और सभी युवा बैंकर्स से मेरा ये साधारण सा सवाल है ...

वी बैंकर्स में है कौन, पहले पता करिये जनाब हम आप साधारण बैंकर ही है जिसका पेशा नेतागिरी करना नही है, आप शायद आज फ्री होंगे इसलिए कमेंट कर पा रहे होंगे, पढ़ पा रहे होंगे ।। वैसे ही वी बैंकर्स की टीम भी आम बैंकर्स है, और आपको ये भी जानना जरूरी है जो लोग मुहिम से जुड़े उसे ये नेता प्रताड़ित करने की बहुत कोशिस कर रहे जिनमे हमारे प्रबीन भाई भी है पर ये हम लोग हारेंगे नही, मूवमेंट को बंद नही होने देंगे

एक साहब ने बात करि 1857 की ... आपको पता है अगर उस टाइम जयचंद टाइप लोग ना होते तो 1947 की जरूरत ही ना पड़ती

ठीक उसी तरह बैंकर्स में जयचंद भरे हुए है वो अपना रूप दिखा कर अच्छी नियुक्ति तो पा लेंगे पर ये नही जान रहे है कि जिस डाल पर वो बैठे है उसी को वो काट रहे है, पीछे भले हो लेकिन नंबर तो उनका भी लगेगा

अब आप की ही बात पर आते है, आप जिस मोबाइल  से यहाँ कमेंट कर रहे है केवल ये बताइये इसके पहले कितने मोबाइल बदले, 1 या 2 तो बदले ही होंगे, बदलने की जरूरत क्यों पड़ी क्योकि नए मोबाइल में आज के जमाने के सारे फंक्शन थे जो पुराने मोबाइल में नही थे और पुराना मोबाइल बंद भी हो जाता था धोखा भी दे देता था और नया मोबाइल फ़ास्ट है और एक्यूरेट है

उसी तरह हमारे बुड्ढे नेता है, अब समय बात का नही हैं अपनी पावर सड़क पर दिखाने की है, वो बात भी तब करेंगे जब उनके ऊपर हम हावी होंगे

और ये iba कौन होता है जिससे बात की जाए, आखिर इसकी जरूरत क्यों है , इसे भंग कर देना चाहिए और जो सैलरी यहाँ जा रही है उसे npa रिकवरी में डाल दो, कम से कम 1% तो npa कम ही हो जाएगा

जब सारे सरकारी डिपार्टमेंट को सैलरी नफा नुकसान से नही मिलता तो बैंक क्यो

और अगर नफा नुकसान से ही देना है तो आ जाओ इंडिविजुअल शाखा के नफा नुकसान पर, लेकिन हां अगर शाखा का नफा 200% हुआ तो वेतन भी 200% बढ़ना चाहिए, साथ ही हमे छोड़ दो हम पर की कैसे प्रॉफिट लाये

पर वो भी नही होगा क्योंकि उसमें गवर्नमेंट की वोट वाली स्कीम बंद हो जाएगी , इन्सुरेंस की कमाई बंद हो जाएगी

अरे इन नेताओं को नेता कौन बनाया ये भी पता करो, आज बैंक में 60% युवा है , किसके वोट से ये नेता बने है, कब कराया था इन्होंने इलेक्शन, शुक्र है इस ग्रुप का की लोग नेताओं के नाम जाने लगे,

 नेता कितना भी बड़ा हो यहाँ तक कि प्रधानमंत्री वो भी जनता को संबोधित करता है, यहाँ 90% सेवानिवृत्त लोगो से पूछ लो क्या उनका इन नेताओं से आज तक कोई मीटिंग हुई है जबकि बरसो से नेता वही है, नही मिला होगा कोई ,

तो भाई जो कभी बैंकर्स से मिला ही नही, उसको बैंकर्स की समस्या का क्या पता और वो क्या बात कर पायेगा , एक हाई स्कूल का बच्चा और दिन रात  घूमने वाला बच्चा भी स्कूल जाकर परीक्षा में तो बैठता है भले ही नकल करे पर यहाँ तो ये नेता बने रहेंगे उसका कॉपीराइट ही करवा के बैठे है

पिछले 4 वर्षों से वी बैंकर्स की तरफ से जब विरोध होना शुरू हुआ और 21 मार्च को दिल्ली में जो हुआ उससे भी ये नेता सबक नही ले रहे कि आज के युवा क्या चाहते है, वो चाहे तो युवा शक्ति को आगे करके पीछे कुशल अभिवावक का पद निर्वाह कर सकते है पर वो भी ये नही करेंगे ..

एक साधारण बैंकर्स को बस काम के बदले उचित तनख्वाह , उसकी काबिलियत के हिसाब से पैसा परिवार के पास रहने का अधिकार, दूसरे बैंकर के सुख दुख में शामिल होने का अधिकार, छूटियो में बच्चो के साथ पार्क में घूमना, सिनेमा देखना और सबसे महत्वपूर्ण एक ऐसा माहौल जिसमे वो बैंकर खुद कहे अपने बच्चो से

बेटा बड़े होकर एक अच्छा बैंकर बनना ।।

बस यही डिमांड है वी बैंकर और हर साधारण बैंकर की साहब ।।। 👏👏👏👏
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